ओडिशा के पवित्र नगर पुरी से एक ऐतिहासिक खोज सामने आई है। जगन्नाथ मंदिर के पास कराए गए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) सर्वे में संकेत मिले हैं कि आधुनिक पुरी के नीचे एक विशाल प्राचीन बस्ती दबी हो सकती है।
श्रीमंदिर परिक्रमा परियोजना के तहत किए गए सर्वे में मंदिर परिसर के आसपास भूमिगत संरचनाओं का पता चला। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 43 संभावित विरासत स्थल चिन्हित किए गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि गंग राजवंश काल में पुरी में सुव्यवस्थित शहरी व्यवस्था मौजूद थी।
इन संरचनाओं के अवशेष एमार मठ, नृसिंह मंदिर, बुढ़ी माँ मंदिर और बड़दांड क्षेत्र के नीचे अधिक पाए गए। मिट्टी के बर्तन, धातु के अवशेष और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ भी मिली हैं, जो उस समय की समृद्धि की कहानी बयान करती हैं।
दीवार, मूर्तियाँ और रहस्यमयी कोठरी
S.G.P.R सर्वे में लगभग 30 फीट ऊँची प्राचीन सुरक्षा दीवार के अवशेष मिले, जो उस समय की रक्षा व्यवस्था को दर्शाते हैं। इसके साथ ही गंगकालीन शैली की विशाल सिंह मूर्तियाँ और 7.6 मीटर लंबी, 3 मीटर चौड़ी रहस्यमयी कोठरी का संकेत मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कोठरी का उपयोग बहुमूल्य धार्मिक वस्तुओं के संरक्षण के लिए किया गया होगा।
समुद्र तक सुरंग और इतिहास की नई परतें
सर्वे में मंदिर परिसर से समुद्र तट तक जाने वाली संभावित गुप्त सुरंग के भी संकेत मिले। माना जा रहा है कि इस सुरंग का उपयोग आपातकालीन स्थितियों या आक्रमण के समय मंदिर की संपदा को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए किया जाता होगा।
इतिहासकारों के अनुसार, 12वीं शताब्दी में अनंतवर्मन चोडगंग देव द्वारा मंदिर निर्माण की शुरुआत की गई थी, जिसे बाद में अनंगभीम देव तृतीय ने पूरा कराया। गंग राजाओं ने पुरी को धार्मिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण “दैवीय राजधानी” के रूप में विकसित किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज केवल स्थापत्य अवशेषों तक सीमित नहीं है, बल्कि सनातन परंपराओं, मठों और साधना स्थलों से जुड़े कई रहस्यों को भी उजागर कर सकती है। भविष्य में इसे वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel