अफगानिस्तान में तालिबान शासन के भीतर शिया और सुन्नी समुदायों के बीच तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में तालिबान सरकार द्वारा अस्थाई विवाह कराने के आरोप में दर्जनों शिया धर्मगुरुओं को हिरासत में लिए जाने के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
शिया समुदाय के शीर्ष धर्मगुरु हुसैनदाद शरीफी ने इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए सांप्रदायिक हिंसा भड़कने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि तालिबान सरकार शिया समुदाय के धार्मिक अधिकारों को सीमित कर रही है, जिससे गंभीर संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार,
शिया समुदाय की नाराजगी के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं—तालिबान का नया कानून जिसमें शिया धार्मिक नियमों को शामिल नहीं किया गया, जाफरी धार्मिक प्रथाओं पर प्रतिबंध, और धार्मिक विद्वानों की गिरफ्तारी।
हाल ही में कई शिया विद्वानों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिन पर अस्थाई विवाह कराने का आरोप था। तालिबान प्रशासन का कहना है कि ये विवाह देश में प्रतिबंधित हैं और इसी कारण कार्रवाई की गई है।
हुसैनदाद शरीफी ने आरोप लगाया कि धार्मिक नेताओं पर दबाव डाला जा रहा है और उन्हें अपने धार्मिक अभ्यास रोकने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने इसे शिया समुदाय के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
वहीं, पीपुल्स इस्लामिक यूनिटी पार्टी के नेता मोहम्मद मोहकिक ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो यह तालिबान के भीतर एक बड़े गृहयुद्ध का रूप ले सकती है।
अफगानिस्तान में सुन्नी समुदाय बहुसंख्यक है और सरकार में भी उनका वर्चस्व है, जबकि शिया समुदाय लगभग 10–12 प्रतिशत है। विशेषज्ञों के अनुसार, तालिबान की नीतियां मुख्य रूप से सुन्नी विचारधारा पर आधारित हैं, जिससे तनाव और बढ़ रहा है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel