नई दिल्ली / पुणे / बारामती
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के चार्टर्ड विमान दुर्घटना की जांच अब तेज हो गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने औपचारिक तौर पर जांच शुरू कर दी है। AAIB की टीम दिल्ली से पुणे पहुंच चुकी है और बारामती के लिए रवाना हो गई है। वहीं, DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर जांच में जुटी हुई है।
जांच एजेंसियां ब्लैक बॉक्स—फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR)—सहित अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण करेंगी। अधिकारियों के मुताबिक ब्लैक बॉक्स मिल चुका है और इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि हादसे के वक्त विमान की गति, ऊंचाई, इंजन की स्थिति और कॉकपिट में पायलटों के बीच क्या बातचीत हुई थी।
इस हादसे के बाद सामने आए वायरल वीडियो में विमान के तेज रफ्तार में होने और एक तरफ झुकते हुए दिखने को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। इन्हीं सवालों को समझने के लिए कई वर्षों तक कमर्शियल फ्लाइट उड़ाने वाले और वर्तमान में प्राइवेट पायलटों को प्रशिक्षण दे रहे फ्लाइट कमांडर आलोक सिंह से बात की गई। उन्होंने कॉकपिट के तकनीकी पहलुओं के जरिए संभावित कारणों को समझाने की कोशिश की। इस दौरान कैप्टन तोमर अवधेश से भी बातचीत की गई।

फ्लाइट कमांडर आलोक सिंह के मुताबिक, इस तरह के चार्टर्ड या लाइट कमर्शियल जेट की लैंडिंग स्पीड सामान्य यात्री विमानों की तुलना में अधिक होती है। जहां एयरबस जैसे बड़े यात्री विमान की लैंडिंग स्पीड लगभग 140 किलोमीटर प्रति घंटा होती है, वहीं ऐसे चार्टर्ड जेट्स की स्पीड करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। उन्होंने बताया कि इस श्रेणी के विमानों के इंजन पुराने फाइटर जेट्स जैसे होते हैं और इन्हें तकनीकी रूप से काफी सक्षम माना जाता है।
वायरल वीडियो में विमान के एक तरफ झुकने को लेकर आलोक सिंह ने कहा कि संभव है पहले प्रयास में लैंडिंग सफल न हो पाने के बाद पायलट ने दोबारा लैंडिंग की कोशिश की हो। DGCA की गाइडलाइंस के अनुसार सुरक्षित लैंडिंग के लिए कम से कम 3 किलोमीटर की विजिबिलिटी जरूरी होती है। कई बार आसमान से एयरपोर्ट दिखाई देता है, लेकिन लैंडिंग के वक्त रनवे स्पष्ट नजर नहीं आता।
उन्होंने आगे कहा कि बारामती जैसे छोटे एयरपोर्ट्स पर आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और एप्रोच लाइट्स की कमी होती है। ऐसे में यदि विजिबिलिटी खराब हो, तो दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, कैप्टन तोमर अवधेश का कहना है कि बारामती एयरपोर्ट पुणे ATC के अधीन आता है और स्थानीय टावर पर अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाएं या अत्यधिक अनुभवी स्टाफ उपलब्ध नहीं होता। ऐसे हालात में पायलट को अपनी दृश्य क्षमता पर ही विमान उतारना पड़ता है, जिससे जोखिम बढ़ सकता है।
अब AAIB और DGCA की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह हादसा तकनीकी खामी, मानवीय त्रुटि या मौसम और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी किसी समस्या के कारण हुआ।
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