स्वीडन में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक नई पहल की घोषणा की है। इस दिशा में प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने महिलाओं के खिलाफ पुरुषों की हिंसा को देश की सबसे गंभीर सामाजिक समस्याओं में से एक बताते हुए इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही है।
स्थानीय समयानुसार बुधवार को स्टॉकहोम में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन ने बताया कि वह क्विन्नोफ्रिड (महिलाओं की शांति) पर गठित एक नई मिनिस्टीरियल काउंसिल की अध्यक्षता करेंगे। इस परिषद का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े मामलों में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह नई पहल गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हिंसा, घरेलू हिंसा और तथाकथित ‘सम्मान’ के नाम पर की जाने वाली हिंसा से निपटने पर केंद्रित होगी। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में कई बार महिलाओं को उनके ही परिवार के सदस्य निशाना बनाते हैं, जिसे रोकने के लिए सरकार ठोस रणनीति पर काम कर रही है।
क्रिस्टर्सन ने यह भी जानकारी दी कि स्वीडिश कैबिनेट पहले ही पैरोल नियमों को सख्त करने और बार-बार अपराध करने वालों के जोखिम आकलन की प्रक्रिया को मजबूत करने का फैसला कर चुकी है, ताकि हिंसक अपराधों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा दिसंबर 2025 के अंत में एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया था। यह बहस तब तेज हुई जब स्टॉकहोम के दक्षिणी इलाके रॉनिंगे और उत्तरी स्वीडन के शहर बोडेन में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की दो गंभीर घटनाएं सामने आईं।
रॉनिंगे में 26 दिसंबर की रात एक 25 वर्षीय महिला के लापता होने की सूचना के बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया। अगले दिन, 27 दिसंबर को महिला का शव बरामद हुआ, जिसके बाद मामले को हत्या के रूप में दर्ज किया गया। वहीं, बोडेन में 25 दिसंबर 2025 को पुलिस को एक घर से आपात कॉल मिली थी, जहां बाद में पुष्टि हुई कि अत्यधिक हिंसा के कारण एक महिला की मौत हो गई थी।
इन घटनाओं के बाद स्वीडन में यह सवाल फिर से उठने लगे हैं कि अधिकारी हिंसक अपराधियों से जुड़े जोखिमों का आकलन कैसे करते हैं और ऐसे मामलों को दोहराए जाने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
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