उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी मामले के मुख्य आरोपी भोला प्रसाद जायसवाल की लगभग 28 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को कोर्ट के आदेश के बाद की गई। फिलहाल भोला प्रसाद जायसवाल सोनभद्र जिला जेल में बंद है।
संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई वाराणसी के तीन अलग-अलग स्थानों पर की गई। सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक वर्मा ने बताया कि विशेष जांच टीम (SIT) की जांच में सामने आया कि भोला प्रसाद एक संगठित आपराधिक गिरोह का संचालन कर रहा था और अवैध कारोबार के जरिए उसने करीब 28.50 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी। इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के तहत अपराध से अर्जित संपत्तियों की कुर्की के लिए कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की गई।
कोर्ट ने साक्ष्यों पर विचार करते हुए गुरुवार (22 जनवरी 2026) को संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया। इसके बाद पुलिस टीम को वाराणसी भेजा गया, जहां कुर्की की कार्रवाई शुरू की गई। कुर्क की गई संपत्तियों में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय शाखा, इंडियन बैंक में जमा 1,13,93,276 रुपये की दो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) शामिल हैं। इसके अलावा 6,89,607 रुपये की राशि वाले दो बैंक खातों को डेबिट फ्रीज किया गया है।
सोनभद्र –
कोडीन कफ सिरप का मामला –
सोनभद्र पुलिस आरोपियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित 28 करोड़ पचास लाख की संपत्ति कुर्क कर रही है,कार्रवाई जारी !! pic.twitter.com/dVE8tjH3UF
— Gaurav Singh Sengar (@sengarlive) January 23, 2026
पुलिस ने लगभग 1.22 करोड़ रुपये की एक मर्सिडीज-बेंज कार भी कुर्क की है। फरवरी 2023 में भोला प्रसाद की पत्नी शारदा जायसवाल के नाम से खरीदे गए वाराणसी के दो आवासीय मकान, जिनकी कीमत करीब 3.03 करोड़ रुपये है, उन्हें भी जब्त कर लिया गया है। साथ ही भेलूपुर इलाके में स्थित लगभग 23 करोड़ रुपये की एक बहुमंजिला इमारत, जो पत्नी के नाम पर खरीदी गई थी, उसे भी कुर्क किया गया है।
जांच में सामने आया कि यह मामला एक बड़े संगठित नेटवर्क से जुड़ा है, जो कोडीन युक्त डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाले कफ सिरप का अवैध भंडारण, बिक्री और तस्करी कर रहा था। कोडीन अफीम से बनने वाला एक नशीला पदार्थ है, जिसका अधिक मात्रा में सेवन करने से नशे जैसा असर होता है और लंबे समय तक उपयोग से इसकी लत लग सकती है, जो हेरोइन या अफीम जैसी गंभीर लत में बदल सकती है।
हाल के वर्षों में कोडीन का इस्तेमाल ‘सॉफ्ट ड्रग’ के रूप में बढ़ा है। कानून के अनुसार, इसे केवल तय मात्रा में और लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं द्वारा ही बेचा जा सकता है, लेकिन यह गिरोह फर्जी दस्तावेज और जाली रिकॉर्ड के जरिए भारी मात्रा में स्टॉक दिखाकर कफ सिरप की अवैध बिक्री कर रहा था। बाद में शेल कंपनियों के जरिए इन सिरप की तस्करी दूसरे राज्यों और सीमा पार तक की जाती थी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश से बाहर कश्मीर, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक फैला हुआ था। खुफिया जानकारी के आधार पर यूपी STF ने लखनऊ में छापा मारा, जिससे पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। इस नेटवर्क की जांच 2024 में शुरू हुई थी और 2025 तक 128 से अधिक FIR दर्ज की गईं, 280 ड्रग लाइसेंस रद्द किए गए, 3.5 लाख से ज्यादा कफ सिरप की शीशियां जब्त की गईं और 32 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया।
अक्टूबर 2025 में सोनभद्र जिले में एक ट्रक पकड़ा गया, जिसमें चिप्स के कार्टन की आड़ में कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़ी खेप छिपाकर ले जाई जा रही थी। जब्त दवाओं की कीमत करीब 3 करोड़ रुपये आंकी गई। इस मामले में मध्य प्रदेश के तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया। जांच में शुभम जायसवाल का नाम सामने आया, जो दुबई में रहता है और भोला प्रसाद जायसवाल का बेटा है।
नवंबर 2025 में यूपी STF ने लखनऊ से अमित कुमार सिंह को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में खुलासा किया कि वह शुभम जायसवाल के इशारे पर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि भोला प्रसाद को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था, जब वह कार्रवाई से बचने के लिए थाईलैंड भागने की कोशिश कर रहा था।
इस पूरे मामले में एक चौंकाने वाला पहलू यह भी सामने आया कि 120–160 रुपये में मिलने वाला कफ सिरप अवैध बाजार में 1200 से 1500 रुपये में बेचा जा रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ इलाकों और बांग्लादेश जैसे मुस्लिम बहुल देशों में इसे शराब के विकल्प के रूप में ‘हलाल’ नशे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे इसकी अवैध मांग और कीमत दोनों तेजी से बढ़ गई थीं।
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