रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से ठीक पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार विदेशी मेहमानों को विपक्षी नेताओं—विशेषकर नेता प्रतिपक्ष—से मिलने नहीं देती। राहुल गांधी ने इसे प्रधानमंत्री की ‘असुरक्षा की भावना’ का संकेत बताया।
हालाँकि, जब इस दावे की जाँच की गई, तो पाया गया कि राहुल गांधी के आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। बीते कुछ वर्षों में स्वयं राहुल गांधी कई विदेशी नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। इन मुलाकातों की तस्वीरें और आधिकारिक रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। भाजपा ने इस आरोप पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी पर देश को बदनाम करने और गंभीर राजनीति न करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी का यह कहना कि विदेशी नेता को सरकार बोलती है के उनसे ना मिले।
विदेश में जाकर देश को बदनाम करने के बाद।
“हम ट्रंप के आगे झुके” या “हमारे जेट गिरा दिए गए” या डेड इकॉनमी कहने के बाद
तुम चाहते हो सरकार विदेशी मेहमानों को भी तुम्हारे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करे। pic.twitter.com/hLuGzizLUQ
— Ocean Jain (@ocjain4) December 4, 2025
राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के समय यह परंपरा रही है कि विदेशी नेता विपक्ष से भी मिलते थे, लेकिन मोदी सरकार इस परंपरा को खत्म कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष भी देश का प्रतिनिधित्व करता है और सरकार उसे विदेशी नेताओं से मिलने नहीं देना चाहती।

लेकिन उपलब्ध प्रमाण राहुल गांधी के आरोपों का खंडन करते हैं। 2022 में राहुल गांधी बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से मिले थे। 2024 में उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात की। 2025 में वे न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से मिले थे। इसके अलावा, मार्च 2025 में उन्होंने नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे और नॉर्वे के राजदूत से भी मुलाकात की थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह पूरी तरह विदेशी मेहमान पर निर्भर करता है कि वे किससे मिलना चाहते हैं।
राहुल गांधी के आरोप पर उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रोटोकॉल तोड़ रही है और यह उसकी असुरक्षा का नतीजा है। प्रियंका के अनुसार, सरकार नहीं चाहती कि कोई दूसरी आवाज सामने आए।
उधर, भाजपा ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए तीखा हमला किया। केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने राहुल गांधी पर गंभीरता की कमी का आरोप लगाया और कहा कि वह विदेशों में भी भारत के लोकतंत्र की आलोचना करते हैं, जो किसी जिम्मेदार नेता का रवैया नहीं है। इस तरह, पुतिन के दौरे से पहले यह विवाद एक बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है।
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