भारत सरकार ने संसद में बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले पाँच वर्षों में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 5,100 से अधिक मामले दर्ज किए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, इस दौरान मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में करीब 95 प्रतिशत मामलों में सजा सुनिश्चित की गई है।
संसद में सवाल के जवाब में दी गई जानकारी
यह जानकारी समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि वर्ष 2020-21 से दिसंबर 2025 के बीच PMLA 2002 के तहत कुल 5,158 मामले जांच के लिए दर्ज किए गए।
राज्यवार आंकड़े उपलब्ध नहीं
मंत्री ने स्पष्ट किया कि किस राज्य में कितने मामले दर्ज हुए, इसका राज्यवार डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन साल-दर-साल मामलों की संख्या का विवरण संसद को दिया गया है।
साल-दर-साल दर्ज मामलों का ब्योरा
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:
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2020–21: 996 मामले
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2021–22: 1,116 मामले
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2022–23: 953 मामले
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2023–24: 698 मामले
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2024–25: 775 मामले
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वर्तमान वित्त वर्ष (दिसंबर 2025 तक): 620 मामले
95% मामलों में सजा, 123 आरोपी दोषी
सरकार ने बताया कि अब तक स्पेशल कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े 58 मामलों में मेरिट के आधार पर फैसले सुनाए हैं। इनमें से 55 मामलों में सजा हुई है और 123 आरोपी दोषी पाए गए हैं। इस तरह सजा की दर 94.82 प्रतिशत रही है।
जांच में देरी पर सरकार का जवाब
जांच में देरी को लेकर उठी चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि आर्थिक अपराधों की जांच तेज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फोरेंसिक टूल्स, मल्टीनेशनल डेटाबेस और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि मामलों का निपटारा जल्द हो सके।
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