कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बड़ी मात्रा में नकदी की आवाजाही का मामला सामने आया है। बेंगलुरु पुलिस और आयकर विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक कार से 9 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके बाद जांच का दायरा तमिलनाडु तक बढ़ाया गया, जहां संबंधित लोगों से जुड़े एक घर की तलाशी में 1.3 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिले। इस तरह पूरे ऑपरेशन में अब तक कुल 10.3 करोड़ रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं।
फिलहाल आयकर विभाग इस रकम के स्रोत, इसके मालिकाना हक और इसे बेंगलुरु से तमिलनाडु के होसुर ले जाने के उद्देश्य की जांच कर रहा है। अधिकारियों की तरफ से अभी यह अंतिम रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है कि बरामद रकम किसी कारोबारी लेनदेन से जुड़ी थी या यह बेहिसाबी नकदी थी।
मंगलवार रात इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास रोकी गई कार
यह कार्रवाई 18 अगस्त 2026 की रात हुई। आयकर विभाग की बेंगलुरु यूनिट-22 के डिप्टी डायरेक्टर जगदीश ने बेंगलुरु सिटी पुलिस से एक संदिग्ध कार को रोकने के लिए मदद मांगी थी। सूचना थी कि कार के जरिए बड़ी मात्रा में नकदी बेंगलुरु से तमिलनाडु के होसुर की ओर ले जाई जा रही है।
इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक सिटी पुलिस स्टेशन की नाइट पेट्रोलिंग टीम ने होसुर रोड पर BETL टोल पार करने के बाद करीब रात 10:30 बजे वाहन को रोका। कार में दो लोग सवार थे। दोनों व्यक्तियों और वाहन को इलेक्ट्रॉनिक सिटी पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उन्हें आयकर विभाग के अधिकारियों के हवाले कर दिया गया।
कार की तलाशी में मिले ₹9 करोड़
आयकर विभाग के अधिकारियों ने कार की जांच की तो उसमें 9 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। रिपोर्ट के मुताबिक वाहन का नंबर KL 20 T 8629 बताया गया है और वह बेंगलुरु से होसुर की तरफ जा रहा था।
कार में मौजूद लोगों में से एक की पहचान 42 वर्षीय सचिन के रूप में हुई है, जिनका संबंध तमिलनाडु के तुथुकुडी स्थित सिंधु ज्वैलर्स से बताया जा रहा है। आयकर अधिकारियों ने दोनों लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और नकदी के स्रोत तथा गंतव्य के संबंध में जानकारी जुटानी शुरू की।
तमिलनाडु में घर की तलाशी, ₹1.3 करोड़ और मिले
कार से इतनी बड़ी नकदी मिलने के बाद जांच तमिलनाडु तक पहुंची। आयकर विभाग ने संबंधित लोगों से जुड़े एक आवासीय परिसर की तलाशी ली, जहां से 1.3 करोड़ रुपये नकद और बरामद किए गए। कार और घर से मिली रकम को जोड़ने पर अब तक की कुल बरामदगी 10.3 करोड़ रुपये हो गई है।
₹10.3 करोड़ कहां से आए? जांच का सबसे बड़ा सवाल
आयकर विभाग के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम का वास्तविक स्रोत क्या था। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि नकदी किसी वैध कारोबारी लेनदेन का हिस्सा थी या इसके दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा जांच में यह भी देखा जा रहा है कि रकम किसे दी जानी थी, इसे होसुर क्यों ले जाया जा रहा था और क्या इस मामले से दूसरे व्यक्ति या कारोबारी प्रतिष्ठान भी जुड़े हुए हैं। आयकर और वित्तीय नियमों के अनुपालन की भी जांच की जा रही है।
तिरुवनंतपुरम में रजिस्टर्ड बताई जा रही कार
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कैश ले जाने के लिए इस्तेमाल की गई क्रेटा कार केरल के तिरुवनंतपुरम जिले के नेय्याट्टिनकारा इलाके में रजिस्टर्ड बताई गई है। कार में रखी नकदी में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट होने की बात भी सामने आई है।
हालांकि जांच अभी जारी है। इसलिए नकदी को अंतिम तौर पर “काला धन” या किसी अपराध की कमाई घोषित करना जल्दबाजी होगी। आयकर विभाग रकम के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है।
बेंगलुरु में नकदी बरामदगी के मामलों ने बढ़ाई हलचल
बेंगलुरु में बड़ी मात्रा में कैश मिलने का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में अलग-अलग जांच एजेंसियों की कार्रवाई में बड़ी नकदी और संपत्तियों की बरामदगी चर्चा में रही है। ताजा मामले में आयकर विभाग की जांच का फोकस इस बात पर है कि ₹10.3 करोड़ की नकदी किसकी थी और इसे बेंगलुरु से तमिलनाडु क्यों भेजा जा रहा था।
जांच पूरी होने और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि मामले में आगे टैक्स कार्रवाई, जुर्माना या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है या नहीं।
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