झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच JSSC CGL परीक्षा से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्य सरकार के उस फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत JSSC CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद JSSC CGL के 1,932 पदों से जुड़ी चयन प्रक्रिया और नियुक्तियों पर तत्काल मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है।
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा फैसला करते हुए 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द, छह परीक्षाओं को स्थगित और 17 पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं की CID जांच कराने का निर्णय लिया था। इसमें JSSC CGL परीक्षा भी शामिल थी। सरकारी फैसले के बाद पहले से चयनित और विभिन्न विभागों में कार्यरत अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।
JSSC CGL अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी?
सरकार के फैसले के खिलाफ JSSC CGL से जुड़े सफल अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। अभ्यर्थियों का प्रमुख तर्क था कि यदि भर्ती परीक्षा में किसी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी हुई है तो जांच एजेंसियों को वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को रद्द कर देना उन उम्मीदवारों के हितों को प्रभावित करता है, जिन्होंने निर्धारित नियमों के तहत परीक्षा दी और योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की। प्रदर्शन कर रहे चयनित उम्मीदवारों ने भी कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी, न कि पूरी भर्ती प्रक्रिया समाप्त करने की।
1,932 पदों की JSSC CGL भर्ती पर क्यों खड़ा हुआ संकट?
JSSC CGL परीक्षा विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत 1,932 पदों के लिए आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पूरी कर सरकारी सेवाओं से जुड़ चुके थे। सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने के बाद इन नियुक्तियों की वैधता और चयनित उम्मीदवारों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए थे।
कई उम्मीदवारों का कहना था कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद उन्होंने दूसरी नौकरियां छोड़ दी थीं और अब परीक्षा रद्द होने के फैसले से उनके रोजगार और आर्थिक भविष्य पर सीधा असर पड़ सकता था। फैसले के विरोध में चयनित अभ्यर्थियों ने रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन भी किया।
सरकार ने क्यों रद्द की थीं भर्ती परीक्षाएं?
झारखंड सरकार का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने के बाद व्यापक जांच और व्यवस्था में सुधार आवश्यक था।
सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने के साथ 17 भर्ती परीक्षाओं, परिणामों और नियुक्तियों की CID जांच का फैसला किया। इनमें 2014 से JPSC और JSSC के जरिए हुई विभिन्न भर्ती प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके अलावा परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का भी फैसला किया गया है।
JSSC CGL को रद्द करने का फैसला चल रही SIT और CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। सरकार ने भर्ती प्रणाली में भविष्य की गड़बड़ियों को रोकने के लिए JPSC और JSSC में आंतरिक मॉनिटरिंग व्यवस्था मजबूत करने की बात कही है।
सफल अभ्यर्थियों का तर्क- दोषियों को सजा मिले, सभी को नहीं
चयनित उम्मीदवारों का कहना है कि वे भी निष्पक्ष जांच के पक्ष में हैं, लेकिन किसी कथित अनियमितता के कारण प्रत्येक सफल उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द कर देना न्यायसंगत नहीं होगा।
उनका तर्क है कि परीक्षा आयोजित करने, प्रश्नपत्र तैयार करने या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर उम्मीदवारों का कोई नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में जांच के जरिए यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि कथित गड़बड़ी में कौन शामिल था और उसी के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए।
हाईकोर्ट की रोक से फिलहाल राहत, कानूनी लड़ाई जारी
झारखंड हाईकोर्ट के अंतरिम हस्तक्षेप का मतलब यह नहीं है कि भर्ती परीक्षा से जुड़ा विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है। फिलहाल सरकार के रद्दीकरण फैसले के अमल पर रोक से प्रभावित उम्मीदवारों को राहत मिली है, लेकिन अदालत आगे मामले की मेरिट और दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार करेगी। JPSC से जुड़े समान मामलों में भी हाईकोर्ट ने रद्दीकरण आदेशों पर अंतरिम रोक लगाई है।
अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को निर्धारित होने की जानकारी है, इसलिए अब चयनित अभ्यर्थियों के साथ-साथ राज्य सरकार की नजर भी अगली सुनवाई पर रहेगी।
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