डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी परमाणु वार्ता के बीच बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान में ‘रेजीम चेंज’ होना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने क्षेत्र में एक बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप भेजा है और हालांकि वे समझौता (डील) करना चाहते हैं, लेकिन बातचीत आसान नहीं रही है।
नॉर्थ कैरोलिना में अमेरिकी सैनिकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि कभी-कभी हालात सुधारने के लिए डर भी जरूरी होता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और मिडिल ईस्ट में सुरक्षा स्थिति पर वैश्विक नजर बनी हुई है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरान को कड़ी चेतावनी दी.
उन्होंने कहा कि अगर वॉशिंगटन के साथ परमाणु समझौता नहीं हुआ तो ईरान को बहुत बुरा नतीजा झेलना पड़ सकता है.
ट्रंप ने मीडिय से बातचीत में कहा कि हमें समझौता करना ही होगा. नहीं तो बात बहुत बिगड़ जाएगी.… pic.twitter.com/4hoGpr1ndl
— One India News (@oneindianewscom) February 13, 2026
मिडिल ईस्ट में सैन्य तैयारी तेज
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंटागन क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य तैनाती की योजना बना रहा है। इसमें एक और एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स, गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर और हजारों अतिरिक्त सैनिक शामिल हो सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि संभावित कार्रवाई सीमित ऑपरेशन से कहीं ज्यादा बड़े संघर्ष में बदल सकती है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: बड़ा क्षेत्रीय संघर्ष संभव
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के पास मजबूत मिसाइल क्षमता है और वह किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने में सक्षम है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि हमले की स्थिति में वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकती है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े स्तर पर टकराव की आशंका बढ़ गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि परमाणु वार्ता और सैन्य गतिविधियों के बीच बढ़ती बयानबाजी वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा संतुलन के लिए अहम मोड़ साबित हो सकती है।
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