उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दान की रकम में कथित हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपितों को शुक्रवार, 26 जून 2026 को स्थानीय अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने आठों आरोपितों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सभी आरोपितों को सोमवार को एक बार फिर अदालत के सामने पेश किया जाएगा।
इस मामले की जाँच विशेष जाँच दल यानी एसआईटी कर रहा है। जाँच के दौरान अब तक कथित तौर पर ₹79.85 लाख की नकदी बरामद की गई है। जाँचकर्ताओं को आशंका है कि बरामद रकम श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की कथित हेराफेरी से जुड़ी हो सकती है।
हालाँकि, आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जाँच जारी है।
सुभाष श्रीवास्तव को छोड़कर अन्य आरोपितों से नकदी बरामद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच एजेंसियों ने लगभग सभी आरोपितों से नकदी बरामद की है। सुभाष श्रीवास्तव के पास से कोई रकम बरामद नहीं होने की बात सामने आई है।
एसआईटी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किस आरोपित के पास से कितनी नकदी मिली, यह रकम कहाँ से आई और इसका मंदिर के चढ़ावे से क्या संबंध है।
बरामद रकम को लेकर आरोपितों से पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही बैंक रिकॉर्ड, कैश काउंटिंग से जुड़े दस्तावेज, ड्यूटी चार्ट और सीसीटीवी फुटेज की भी जाँच किए जाने की बात सामने आई है।
मामले में कौन-कौन आरोपित?
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर दान प्रकरण में दर्ज एफआईआर में निम्न आठ लोगों को नामजद किया गया है—
- अविनाश शुक्ला
- अनुकल्प मिश्रा
- लवकुश मिश्रा
- मनीष कुमार यादव
- करुणेश पांडेय
- रमाशंकर मिश्रा
- सुभाष श्रीवास्तव
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
एफआईआर में कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। जाँच में नए तथ्य सामने आने पर और लोगों से पूछताछ या उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
कैश गिनने वाली एजेंसी से जुड़े थे छह आरोपित
प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आठ में से छह आरोपित एक बैंक की आउटसोर्स कैश मैनेजमेंट एजेंसी से जुड़े हुए थे। इस एजेंसी को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले नकद दान और चढ़ावे की गिनती का काम सौंपा गया था।
सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को छोड़कर बाकी छह आरोपितों के इसी एजेंसी से जुड़े होने की बात सामने आई है।
जाँच एजेंसियों का आरोप है कि ये छह लोग दान की रकम गिनने की प्रक्रिया में सीधे शामिल थे। आशंका है कि नोटों की गिनती के दौरान ही दान की रकम में कथित हेराफेरी की गई।
दान की गिनती के दौरान रकम निकालने का आरोप
एफआईआर और शुरुआती जाँच के अनुसार, मंदिर के चढ़ावे और दान की गिनती के दौरान कथित रूप से रकम निकाली गई। जाँचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि यह गड़बड़ी कितने समय से चल रही थी और इसमें कुल कितनी रकम की हेराफेरी हुई।
जाँच के दायरे में दान की गिनती करने वाले कर्मचारी, निगरानी व्यवस्था, बैंक से जुड़ी एजेंसी और उस समय मौजूद जिम्मेदार अधिकारी भी बताए जा रहे हैं।
एसआईटी यह भी जाँच रही है कि दान की गिनती के दौरान सुरक्षा और निगरानी के निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं। इसके अतिरिक्त यह भी पता लगाया जा रहा है कि किसी व्यक्ति ने सीसीटीवी कैमरों या अन्य सुरक्षा व्यवस्था से छेड़छाड़ की थी या नहीं।
ट्रस्ट की शिकायत के बाद दर्ज हुई एफआईआर
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत के आधार पर राम जन्मभूमि थाने में मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितता के आरोपों की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था।
एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट शासन को सौंपने के बाद आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद आठ नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई तथा सभी आठ नामजद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गंभीर धाराओं में दर्ज किया गया मामला
आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति रखने, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं। हालाँकि, आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना अभी बाकी है।
जाँच पूरी होने के बाद एसआईटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप सकती है। इसके आधार पर आरोपपत्र दाखिल करने और आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
एसआईटी किन सवालों की जाँच कर रही है?
एसआईटी मुख्य रूप से निम्न पहलुओं की जाँच कर रही है—
- दान की रकम में कथित गड़बड़ी कब और कैसे शुरू हुई?
- मंदिर से कुल कितनी रकम की हेराफेरी की गई?
- कैश गिनने वाली एजेंसी के कर्मचारियों की क्या भूमिका थी?
- बरामद ₹79.85 लाख में किस आरोपित से कितनी रकम मिली?
- क्या किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति ने आरोपितों की सहायता की?
- क्या सीसीटीवी या अन्य सुरक्षा व्यवस्था से छेड़छाड़ की गई?
- दान की गिनती और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में कहाँ चूक हुई?
जाँच एजेंसियाँ वित्तीय लेनदेन, आरोपितों की संपत्ति, बैंक खातों और आपसी संपर्कों की भी पड़ताल कर सकती हैं।
29 जून को दोबारा होगी पेशी
अदालत ने फिलहाल सभी आठ आरोपितों को 29 जून 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। सोमवार को उनकी दोबारा अदालत में पेशी होगी। उस दौरान जाँच एजेंसी आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की माँग कर सकती है या अदालत न्यायिक हिरासत को लेकर नया आदेश जारी कर सकती है।
मामले में आगे होने वाली बरामदगी, एसआईटी की जाँच और अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी।
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