गुजरात में आतंकवाद से जुड़े एक गंभीर मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। National Investigation Agency (NIA) ने मंगलवार (5 मई 2026) को अहमदाबाद कोर्ट में ISIS से जुड़ी कथित बायोटेरर साजिश के मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है।
इस मामले में एक डॉक्टर सहित तीन लोगों पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन Islamic State (ISIS) से जुड़कर “बायोटेररिज्म” की साजिश रचने का आरोप है।
क्या थी साजिश?
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने सार्वजनिक स्थानों पर खाने-पीने की चीजों में जहरीला पदार्थ मिलाकर बड़े पैमाने पर हमले की योजना बनाई थी। इस साजिश में “Ricin” का इस्तेमाल करने की तैयारी थी, जो अरंडी के बीजों से बनने वाला अत्यंत घातक विष है और इसे जैविक हथियार के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
आरोपी कौन हैं?
NIA के मुताबिक इस मामले में शामिल आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
- डॉ. सैयद अहमद मोहिउद्दीन (हैदराबाद)
- आज़ाद (उत्तर प्रदेश)
- मोहम्मद सुहेल (उत्तर प्रदेश)
इन सभी पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कैसे फैलाई जा रही थी साजिश?
जांच में सामने आया कि आरोपी अपने विदेशी संपर्कों के जरिए Islamic State से जुड़े हुए थे। वे युवाओं को गुमराह कर आतंकी संगठन में भर्ती करने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें “जिहाद” के नाम पर कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा था।
3 accused have been charged in Ahmedabad in ISIS-linked Jihadi bioterrorism conspiracy to carry out mass poisoning in public spaces. Hyderabad-based doctor Syed Ahmed Mohiuddin, and co-accused Azad & Suhel from U.P, have been charged under UA (P) Act, BNS and Arms Act. pic.twitter.com/yjII5fw9jU
— NIA India (@NIA_India) May 5, 2026
गिरफ्तारी और बरामदगी
यह मामला सबसे पहले Gujarat Anti-Terrorism Squad (ATS) द्वारा नवंबर 2025 में दर्ज किया गया था। उस समय डॉक्टर सैयद मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा पर गिरफ्तार किया गया, जहां उसकी कार से:
- अवैध हथियार
- चार लीटर अरंडी का तेल
- संदिग्ध सामग्री
बरामद की गई थी।
जांच NIA को ट्रांसफर
जांच के दौरान दो अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी हुई। बाद में यह केस जनवरी 2026 में केंद्रीय एजेंसी National Investigation Agency को सौंप दिया गया, जिसने अब कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।
आगे की कार्रवाई
अदालत में दायर चार्जशीट के बाद अब मामला ट्रायल चरण में जाएगा। एजेंसियों का कहना है कि यह साजिश अगर सफल होती तो बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी।
निष्कर्ष
यह मामला भारत में बढ़ते साइबर और बायोलॉजिकल टेररिज्म के खतरे की ओर गंभीर संकेत देता है। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के चलते समय रहते इस बड़ी साजिश को नाकाम किया जा सका।
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