अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी गुरुवार को भारत की सात दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुँचे। यह यात्रा भारत और तालिबान-प्रशासित अफगान सरकार के बीच संबंध सुधारने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक पहल मानी जा रही है। मुत्ताकी अपनी इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। गौरतलब है कि भारत ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन 2021 से मानवीय सहायता और व्यापार के माध्यम से व्यावहारिक संबंध बनाए हुए है।
अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान सरकार के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी ने दिल्ली में आगमन कर लिया है। यह भारत में किसी वरिष्ठ तालिबान नेता की पहली मंत्री स्तरीय यात्रा है, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद हो रही है। pic.twitter.com/VLkYLZjEA9
— Lallanpost (@Lallanpost) October 9, 2025
मुत्ताकी पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिबंध लागू हैं, इसलिए उन्हें इस यात्रा के लिए UN सुरक्षा परिषद (UNSC) से विशेष यात्रा छूट दी गई है। इस दौरे से पहले दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकें हो चुकी हैं। जनवरी 2025 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दुबई में मुत्ताकी से मुलाकात की थी, और मई 2025 में डॉ. एस. जयशंकर ने भी उनसे बातचीत की थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई उस बातचीत में काबुल ने हमले की कड़ी निंदा की थी। तालिबान सरकार भारत को “महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और आर्थिक साझेदार” के रूप में देखती है।
दौरा: देवबंद, ताजमहल और व्यापार पर फोकस
अमीर खान मुत्ताकी भारत आने वाले पहले वरिष्ठ तालिबान अधिकारी हैं। अपनी यात्रा के दौरान वे न केवल राजनीतिक बैठकों में हिस्सा लेंगे, बल्कि कई सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का भी दौरा करेंगे।
- शनिवार (11 अक्टूबर 2025) को मुत्ताकी देवबंद के प्रसिद्ध दारुल उलूम मदरसे का दौरा करेंगे। यह मदरसा तालिबान के कई नेताओं के लिए सम्मान का प्रतीक रहा है और यहाँ कुछ अफगान छात्र भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
- रविवार (12 अक्टूबर 2025) को वह आगरा जाकर ताजमहल का भ्रमण करेंगे।
- सोमवार (13 अक्टूबर 2025) को वे नई दिल्ली में एक प्रमुख उद्योग मंडल के कार्यक्रम में शामिल होंगे और भारतीय व्यापार एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। तालिबान सरकार भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करना चाहती है।
- उसी दिन मुत्ताकी दिल्ली में अफगान समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे।
- बुधवार (15 अक्टूबर 2025) को वे भारत दौरा समाप्त कर काबुल लौट जाएंगे।
राजदूत शाहीन का बयान
मुत्ताकी की भारत यात्रा से पहले कतर में अफगानिस्तान के राजदूत मुहम्मद सुहैल शाहीन ने इस दौरे को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच ऐतिहासिक और गहरे संबंध हमेशा रहे हैं, चाहे सरकार कोई भी रही हो। उनके अनुसार, यह यात्रा आपसी विश्वास बढ़ाने और मतभेदों को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
शाहीन ने यह भी कहा कि तालिबान को अभी तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिलने के पीछे राजनीतिक कारण हैं। उन्होंने कहा, “हमने विदेशी कब्जे से आजादी अपनी जनता के समर्थन से हासिल की है, ठीक वैसे ही जैसे भारत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता पाई थी।” शाहीन का मानना है कि चूँकि तालिबान का पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण है और वे देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम हैं, इसलिए उन्हें वैध सरकार के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।
व्यापार और कनेक्टिविटी पर चर्चा
राजदूत शाहीन ने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक उच्च-स्तरीय संयुक्त समिति बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह समिति शिक्षा, व्यापार और बुनियादी ढाँचा विकास जैसे क्षेत्रों में नियमित बैठकें कर सकती है। जब उनसे भारत-अफगानिस्तान व्यापार में पाकिस्तान द्वारा अवरोध के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दो विकल्प बताए।
पहला — पाकिस्तान को चाहिए कि जैसे वह मध्य एशिया के साथ अपने व्यापार के लिए अफगानिस्तान से होकर गुजरता है, वैसे ही भारत-अफगान व्यापार के लिए भी मार्ग प्रदान करे।
दूसरा — उन्होंने चाबहार पोर्ट को एक व्यवहारिक विकल्प बताया और कहा कि भारत और अफगानिस्तान को मिलकर चाबहार के जरिये व्यापारिक सुविधाएँ बेहतर करनी चाहिए।
भारत की मानवीय सहायता
भारत ने हमेशा अफगान जनता की सहायता में अग्रणी भूमिका निभाई है। सितंबर 2025 के भूकंप के बाद भारत ने सबसे पहले राहत सामग्री भेजी थी — जिसमें 1,000 परिवारों के लिए टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री शामिल थी। इसके अलावा 21 टन दवाइयाँ, कंबल, जनरेटर और स्वच्छता सामग्री भी अफगानिस्तान पहुँचाई गई।
अगस्त 2021 से अब तक, भारत 50,000 टन गेहूँ, 330 टन से अधिक दवाइयाँ और टीके, तथा 40,000 लीटर कीटनाशक जैसी आवश्यक राहत सामग्री दे चुका है। इन प्रयासों से भारत ने यह दिखाया है कि वह तालिबान को मान्यता न देने के बावजूद अफगान जनता के साथ खड़ा है।
भारत के करीब आने का मौका
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को समर्थन देने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे माहौल में मुत्ताकी के पास भारत के साथ संबंध मजबूत कर क्षेत्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर है। राजदूत सुहैल शाहीन ने भी कहा कि यह दौरा “आपसी विश्वास और सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम” है। इससे स्पष्ट है कि काबुल अब नई दिल्ली को एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देख रहा है।