Gujarat में कुकिंग गैस की उपलब्धता को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने दूसरे गैस सिलेंडर की बुकिंग का समय 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है।
राज्य के सिविल सप्लाई मंत्री Raman Solanki ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल राज्य के सप्लाई विभाग के पास 4,16,500 गैस सिलेंडर का स्टॉक मौजूद है।
मुख्यमंत्री ने की समीक्षा बैठक
कुकिंग गैस की स्थिति को लेकर शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री के आवास पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
सरकार ने जनता से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है और अफवाहों के आधार पर गैस सिलेंडर के लिए भागदौड़ न करें। हालांकि सरकार ने लोगों को जनहित में गैस और बिजली की खपत कम करने के सुझाव भी दिए हैं।
PNG कनेक्शन को बढ़ावा
सरकार ने निर्देश दिया है कि जिन इलाकों में City Gas Distribution नेटवर्क उपलब्ध है, वहां रेस्टोरेंट, होटल, शैक्षणिक संस्थान और सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं को तुरंत नए PNG कनेक्शन दिए जाएं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार भविष्य में अंतरराष्ट्रीय हालात या संभावित युद्ध जैसी परिस्थितियों का अनुमान लगाना मुश्किल है, इसलिए ऊर्जा संसाधनों का सावधानी से उपयोग जरूरी है।
गैस और बिजली बचाने के लिए सरकार के सुझाव
गैस बचाने के लिए:
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खाना बनाने में प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करें
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दाल, चावल और दलहन को पहले भिगोकर पकाएं
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वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में सोलर कुकर का इस्तेमाल करें
बिजली बचाने के लिए:
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AC का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रखें
ईंधन बचाने के लिए:
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पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट और शेयरिंग मोड का उपयोग करें
ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए कमेटी गठित
राज्य में गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए सिविल सप्लाई सचिव Mona Khandhar को स्टेट लेवल मॉनिटरिंग कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है।
जिला स्तर पर कलेक्टर इस कमेटी की अगुवाई करेंगे और अलग-अलग जगहों पर जांच अभियान चलाया जाएगा।
केरोसिन भी मंगाया गया
हालात को देखते हुए गुजरात सरकार ने India सरकार से इस साल के कोटे से 14.52 लाख लीटर केरोसिन एड-हॉक आधार पर मंगाया है।
गौरतलब है कि गुजरात पिछले तीन वर्षों से ‘जीरो केरोसिन राज्य’ रहा है और खाना पकाने के लिए केरोसिन का वितरण बंद कर दिया गया था।
अब सरकार ने घोषणा की है कि ग्रामीण, आदिवासी और गरीब परिवारों को हर महीने 5 लीटर केरोसिन दिया जाएगा, जबकि स्कूल, हॉस्टल, इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन यूनिट्स को 25 लीटर उपलब्ध कराया जाएगा।
एजेंसियों के सामने नई चुनौती
चूंकि गुजरात लंबे समय से जीरो केरोसिन राज्य रहा है, इसलिए कई पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसियों ने केरोसिन से जुड़े उपकरण और वाहन बेच दिए हैं।
एजेंसियों का कहना है कि अगर सरकार रियायती दर पर केरोसिन वितरण करना चाहती है, तो उन्हें स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट के लिए नए उपकरण और वाहन उपलब्ध कराने होंगे।
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