मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Iran, Israel और United States के बीच टकराव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है।
ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
गौरतलब है कि इस समुद्री मार्ग से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक तेल बाजार को सीधे प्रभावित करती है।
अमेरिका ने रूसी तेल पर अस्थायी राहत दी
तेल बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच United States ने Russia के तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को 30 दिनों के लिए अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है।
The U.S. spent months on bullying India into ending oil imports from Russia. After two weeks of war with Iran, White House is now begging the world—incl India—to buy Russian crude.
Europe thought backing illegal war on Iran would win U.S. support against Russia.
Pathetic. pic.twitter.com/fbkrXpXa9P
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) March 13, 2026
इस फैसले के बाद ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने अमेरिका की नीति पर तंज कसते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।
ईरान के विदेश मंत्री का अमेरिका पर तंज
Seyed Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर एक समाचार रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा कि अमेरिका की नीतियों में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले India समेत कई देशों पर रूस से तेल खरीद बंद करने का दबाव बना रहा था, लेकिन अब खुद दुनिया से रूसी कच्चा तेल खरीदने की अपील कर रहा है।
यूरोप पर भी साधा निशाना
ईरानी विदेश मंत्री ने Europe पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यूरोपीय देशों को लगा था कि ईरान के खिलाफ युद्ध का समर्थन करने से उन्हें रूस के खिलाफ अमेरिका का पूरा साथ मिलेगा।
उन्होंने इस स्थिति को “बेहद शर्मनाक” बताते हुए कहा कि वैश्विक राजनीति में दोहरे मानदंड साफ दिखाई दे रहे हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ा था दबाव
दरअसल Russia‑Ukraine War के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने कई बार भारत जैसे देशों से रूसी तेल की खरीद कम करने की अपील की थी।
पश्चिमी देशों का तर्क था कि रूस की ऊर्जा बिक्री से उसे आर्थिक फायदा मिल रहा है।
हालांकि अब मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से टकराव के कारण वैश्विक तेल बाजार में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है।
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