चंद्रपुर: किसान की किडनी बेचने के मामले में SIT को बड़ी कामयाबी
कर्ज चुकाने के लिए किसान की किडनी बेचने के बहुचर्चित मामले में एसआईटी को बड़ी सफलता मिली है। चंद्रपुर स्थानीय अपराध शाखा ने इस अवैध किडनी तस्करी रैकेट के मुख्य किंगपिन और एजेंट ‘डॉ. कृष्णा’ को सोलापुर से गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी को मामले में अब तक की सबसे अहम कार्रवाई माना जा रहा है।
राज्यभर में फैले हो सकते हैं रैकेट के तार
सोलापुर से हुई गिरफ्तारी के बाद पुलिस को संकेत मिले हैं कि इस किडनी तस्करी गिरोह के तार महाराष्ट्र के कई अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को आशंका है कि इस रैकेट के शिकार लोगों की संख्या काफी ज्यादा हो सकती है। चंद्रपुर पुलिस अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि इस अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी गिरोह से जुड़े अन्य एजेंटों, डॉक्टरों और बड़े अस्पतालों की भूमिका सामने लाई जा सके।

किसान से कर्ज के बदले निकलवा ली गई किडनी
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के किसान रोशन कुडे ने पुलिस को बताया था कि साहूकारों के भारी दबाव के चलते उसे अपनी किडनी बेचने के लिए मजबूर किया गया। रोशन के अनुसार, उस पर कुल 74 लाख रुपये का कर्ज बताया गया था, जिसे चुकाने के लिए उसे यह कदम उठाना पड़ा।
कोलकाता से कंबोडिया तक चला पूरा खेल
किसान रोशन कुडे ने बताया कि एजेंट के संपर्क में आने के बाद उसे पहले कोलकाता ले जाया गया, जहां एक डॉक्टर द्वारा उसकी मेडिकल जांच की गई। इसके बाद उसे कंबोडिया भेजा गया, जहां उसकी किडनी निकाल ली गई। इसके बदले उसे केवल 8 लाख रुपये दिए गए।
40 फीसदी ब्याज ने बढ़ाया कर्ज का जाल
रोशन कुडे ने वर्ष 2021 में दो साहूकारों से 50,000 रुपये उधार लिए थे, जिस पर 40 प्रतिशत की भारी ब्याज दर लगाई गई थी। बाद में साहूकारों ने दावा किया कि ब्याज समेत यह रकम बढ़कर 74 लाख रुपये हो गई। इसी दबाव में आकर किसान ने किडनी बेचने जैसा खौफनाक फैसला लिया।
पहले साहूकार, अब किडनी रैकेट पर शिकंजा
इस मामले में ब्रह्मपुरी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। शुरुआती जांच के दौरान पुलिस ने छह साहूकारों को गिरफ्तार किया। अब एसआईटी ने किडनी तस्करी रैकेट के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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