Pakistan की राजधानी Islamabad इन दिनों कड़े सुरक्षा घेरे में पूरी तरह ‘किले’ में तब्दील हो गई है। United States और Iran के बीच संभावित शांति वार्ता की तैयारियों के चलते पूरे शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है।
शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है, बाजार बंद हैं और हर चौराहे पर भारी संख्या में सेना और पुलिस बल तैनात है। यह नजारा लोगों को COVID-19 महामारी के दौर की याद दिला रहा है, जब पूरी दुनिया ठहर सी गई थी।
रोजगार और आम जीवन पर असर
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामाबाद और Rawalpindi में कई दिनों से यातायात लगभग ठप है। सरकारी और निजी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिया गया है, लेकिन सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है। सार्वजनिक परिवहन बंद होने और बाजारों में सन्नाटा होने के कारण हजारों लोग बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।
टैक्सी चालकों की आय में भारी गिरावट आई है, जबकि होटल और रेस्तरां पूरी तरह बंद हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि हॉस्टलों में रहने वाले कई छात्रों और कामकाजी लोगों को अचानक कमरे खाली करने के निर्देश दे दिए गए, जिससे वे अस्थिरता और परेशानी का सामना कर रहे हैं।
ऊर्जा संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
ईरान-अमेरिका तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। खासतौर पर Strait of Hormuz के बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है। देश में लंबे समय तक बिजली कटौती और एलपीजी गैस की भारी कमी देखी जा रही है।
सुरक्षा के बीच अनिश्चितता
सुरक्षा के नाम पर इस्लामाबाद के रेड जोन को पूरी तरह सील कर दिया गया है। सड़कों पर आम नागरिकों की आवाजाही लगभग बंद है और केवल सेना व पुलिस के वाहन ही नजर आ रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि इतनी सख्त तैयारियों के बावजूद अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता कब और कहाँ शुरू होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की प्रस्तावित यात्रा भी टल गई है, जबकि ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी अभी तक आने को लेकर असमंजस में है।
फिलहाल, इस अनिश्चितता के बीच आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और शहर में हालात सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है।
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