जीतू भाई, बम विस्फोट हुआ… 11 मिनट में थम गई मुंबई की जीवनरेखा
11 जुलाई 2006 का दिन मुंबई के इतिहास में एक काले दिन के रूप में दर्ज है। मंगलवार शाम 6:24 बजे, खार स्टेशन के पास बोरीवली जा रही लोकल ट्रेन में पहला बम विस्फोट हुआ। यही वह धमाका था जिसे पत्रकार जीतेन्द्र दीक्षित के सहयोगी ओडिस्टीवन गोम्स ने अपनी इमारत से देखा और फोन कर उन्हें सूचित किया। इसके बाद माटुंगा रोड, माहिम, बांद्रा, जोगेश्वरी और खार स्टेशनों पर महज 11 मिनट के अंदर कुल सात विस्फोट हुए, जिनमें कुल 209 लोगों की जान गई और 700 से अधिक लोग घायल हुए। उस समय सभी मोबाइलों में कैमरा नहीं था, इसलिए न्यूज़ टीमों को मौके पर पहुंचाने में तेजी करनी पड़ी। दीक्षित, जो उस दिन छुट्टी पर थे और “कृष” फिल्म देखने गए थे, घटनास्थल की ओर दौड़े और सबसे पहले माटुंगा रोड स्टेशन पहुंचे। वहां ट्रेन का ढांचा टूट चुका था, हर ओर खून, मांस और चीख-पुकार फैली थी। बारिश राहत कार्य में बाधा बनी रही, लेकिन स्थानीय लोगों ने अपनी ओर से हरसंभव मदद की।
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वेस्टर्न रेलवे पूरी तरह ठप हो गई और इसका असर सड़क यातायात पर भी पड़ा। लोग घर लौटने के लिए बसों, टैक्सियों, यहां तक कि ट्रकों से लटक कर सफर करते नजर आए। कई को अपने ऑफिस या परिचितों के घरों में रात गुजारनी पड़ी। विस्फोटों के समय, ज्यादातर गुजराती स्टॉकब्रोकर उपनगरों की ओर लौट रहे थे, जिससे आशंका जताई गई कि यह हमले गुजरात दंगों के बदले के लिए किए गए। विस्फोटों की जिम्मेदारी लश्कर-ए-कह्हार नामक एक अनजान संगठन ने ली थी, जिसने एक टीवी चैनल को ईमेल भेजकर आगे भी हमलों की धमकी दी।
जांच के दौरान ATS ने 12 लोगों पर आरोप लगाए, जिन पर प्रेशर कुकर में बम बनाकर ट्रेनों में रखने का आरोप था। कहा गया कि यह साजिश ISI और लश्कर-ए-ताइबा ने सिमी के सहयोग से रची थी। हालांकि 2008 में मुंबई क्राइम ब्रांच ने इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य सादिक शेख को गिरफ्तार कर दावा किया कि बम शिवड़ी के एक फ्लैट में बनाए गए थे और उसने ही विस्फोटों को अंजाम दिया था। इससे जांच एजेंसियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। 2015 में अदालत ने ATS द्वारा गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई, सात को उम्रकैद और एक आरोपी को बरी कर दिया गया।
मुंबई ट्रेन धमाके स्पेन के मैड्रिड (2004) और लंदन (2005) में हुए विस्फोटों जैसे ही थे, जिनमें भी लोकल ट्रेनों को निशाना बनाकर सैकड़ों जानें ली गई थीं। इस भयावह त्रासदी ने यह दिखा दिया कि कैसे चंद मिनटों में भारत की आर्थिक राजधानी की जीवनरेखा थम सकती है।