मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई में जारी आंदोलन पर बॉम्बे हाईकोर्ट में विशेष सुनवाई हुई। कोर्ट ने आंदोलन के नेता मनोज जरांगे को सख्त चेतावनी दी कि बिना प्रशासन की अनुमति के किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अनिश्चितकालीन धरना या प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान शहर की कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को बाधित करने वाले किसी भी आंदोलन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्कूल-कॉलेज की स्थिति को लेकर भी सवाल किए। सरकार ने जवाब दिया कि कल से स्कूल खोल दिए जाएंगे। अदालत को बताया गया कि एक दिव्यांग महिला 5 घंटे तक ट्रैफिक में फंसी रही। वहीं, वकील गुणरत्न सदावर्ते ने तर्क दिया कि आंदोलन में सीधा राजनीतिक हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता आंदोलनकारियों को खाना-पानी ट्रकों में भेज रहे हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 2024 के सरकारी आदेश (GR) के अनुसार मराठा समुदाय को आरक्षण दिया गया है। इस पर वकील ने कहा कि आरक्षण ओबीसी कोटे से चाहिए। अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या मुंबईवासियों की परेशानियां ऐसे ही चलती रहेंगी जब तक आंदोलनकारियों की मांग पूरी न हो जाए।
सरकार ने कहा कि कोर्ट के आदेशों के अनुसार परमिशन दी गई थी, लेकिन आंदोलनकारियों ने उसका पालन नहीं किया। अदालत ने सरकार से सवाल किया कि जब तय संख्या से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं, तो कार्यवाही क्यों नहीं की गई। इस पर सरकार ने तर्क दिया कि पुलिस कार्रवाई कर रही है, लेकिन हालात को देखते हुए एक डर भी बना हुआ है कि यदि लाठीचार्ज किया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
कोर्ट ने सरकार से दो टूक पूछा कि आखिर मुंबई के लोगों की ये परेशानी कब तक जारी रहेगी और सरकार आंदोलनकारियों पर सख्त निर्देश कब लागू करेगी।
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