भारतीय नौसेना के बेड़े में आज एक और शक्तिशाली जहाज शामिल हो गया है। नौसेना के दूसरे पनडुब्बी रोधी उथले पानी के युद्धक जहाज (ASW-SWC) आईएनएस एंड्रोथ (INS Androth) को आज औपचारिक रूप से नौसेना को सौंपा गया। इस अत्याधुनिक युद्धपोत की कमीशनिंग भारत की समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। आईएनएस एंड्रोथ को भारतीय नौसेना की उप-सतह क्षमता बढ़ाने और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। यह जहाज तटीय जल में उन्नत हथियारों और सेंसरों के साथ संचालन करने में सक्षम है, जिससे देश की समुद्री सीमाओं की निगरानी और रक्षा और अधिक सशक्त होगी।
नाम का महत्व — क्यों रखा गया “एंड्रोथ”?
इस युद्धपोत का नाम लक्षद्वीप के एंड्रोथ द्वीप के नाम पर रखा गया है। एंड्रोथ द्वीप ऐतिहासिक रूप से भारत के पश्चिमी समुद्री तट का प्रहरी रहा है, जो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी करता है। ये मार्ग भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस द्वीप से प्रेरणा लेते हुए जहाज का नामकरण किया गया है ताकि यह प्रतीक बन सके भारत के उन प्रहरी द्वीपों का, जो देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करते हैं और तस्करी, समुद्री डकैती एवं घुसपैठ जैसी चुनौतियों का सामना करते हैं।
🚨⚓️ भारतीय नौसेना में आज शामिल हो रहा है एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट ‘INS अंद्रोथ’।
💥 लैस है RBU-6000 रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो ट्यूब, 30mm गन और सोनार सिस्टम से।
🔱 समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को देगा नई ताकत।
💥 देखिए इसका फायर पावर 🔥
🎖️ विशाखापत्तनम में समारोह की… pic.twitter.com/5meBhf05jb
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) October 6, 2025
भारत के समुद्री तट की निगरानी में नई ताकत
एंड्रोथ जहाज भारत के पश्चिमी समुद्री सुरक्षा ग्रिड को मजबूती देगा। यह जहाज अरब सागर और तटीय इलाकों में निगरानी रखेगा, जहां पारंपरिक बड़े युद्धपोत पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नज़र रखने में सीमित होते हैं। प्रतीकात्मक रूप से, एंड्रोथ द्वीप की प्रहरी भूमिका को अब नौसेना ने इस युद्धपोत के साथ जोड़ा है। जिस तरह द्वीप अरब सागर पर निगरानी रखता है, उसी तरह आईएनएस एंड्रोथ भी समुद्र में भारत के हितों की रक्षा करते हुए “समंदर का शिकारी” कहलाएगा।
आईएनएस एंड्रोथ की तकनीकी खूबियां
कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित यह युद्धपोत “आत्मनिर्भर भारत” का जीवंत उदाहरण है। 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना यह जहाज लगभग 1500 टन वजनी और 77 मीटर लंबा है। इसे अत्याधुनिक सेंसर, हथियार और प्रणोदन प्रणाली से लैस किया गया है। यह विशेष रूप से तटीय युद्धक्षेत्रों में पानी के नीचे के खतरों का पता लगाने और उन्हें बेअसर करने के लिए डिजाइन किया गया है।
एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी वर्ग के इन जहाजों को उथले पानी में काम करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें परिवर्तनीय गहराई वाला सोनार, टॉरपीडो, माइन और नजदीकी एएसडब्ल्यू हथियार लगे हैं। यह जहाज तटीय इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने की भारत की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। इससे दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए भारतीय जल क्षेत्र के पास काम करना बेहद कठिन हो जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत की ओर नौसेना की छलांग
आईएनएस एंड्रोथ का भारतीय नौसेना में शामिल होना सिर्फ एक नया जहाज जोड़ना नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है। यह युद्धपोत भारत की तकनीकी क्षमता, स्वदेशी डिजाइन और निर्माण क्षमता का प्रतीक है। इससे पहले भारतीय नौसेना में ‘अर्नाला, निस्तार, उदयगिरि, नीलगिरि’ जैसे स्वदेशी जहाज शामिल हो चुके हैं, और अब ‘एंड्रोथ’ के जुड़ने से नौसेना की शक्ति और भी सुदृढ़ हो गई है।
शामिल करने का समारोह
आईएनएस एंड्रोथ को नौसेना के बेड़े में शामिल करने के लिए आयोजित समारोह की अध्यक्षता फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पूर्वी नौसेना कमान वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर ने की। यह कार्यक्रम विशाखापत्तनम नौसेना डॉकयार्ड में हुआ। नौसेना की ओर से कहा गया कि एंड्रोथ को शामिल करना क्षमता वृद्धि और स्वदेशीकरण के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।