ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े अलग-अलग मॉड्यूल के गुजरात में सक्रिय होने के मामले सामने आए हैं। गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड यानी ATS ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर कई संदिग्ध आतंकियों को किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने से पहले गिरफ्तार किया है। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या गुजरात आतंकवादी संगठनों के लिए नया सॉफ्ट टारगेट बन रहा है?
गुजरात ATS के DIG सुनील जोशी ने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा कि गुजरात सॉफ्ट स्टेट नहीं बन रहा है। उनके मुताबिक, ATS की सक्रियता के कारण आतंकी मॉड्यूल वारदात से पहले ही पकड़ लिए जा रहे हैं। फरवरी 2023 से जुलाई 2026 के बीच गुजरात ATS ने कथित रूप से 42 आतंकियों या आतंकी गतिविधियों से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
क्या गुजरात आतंकियों के लिए सॉफ्ट स्टेट बन रहा है?
DIG सुनील जोशी के अनुसार गुजरात को सॉफ्ट स्टेट कहना सही नहीं होगा। उन्होंने बताया कि गुजरात ATS केवल राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी सक्रिय होकर आतंकवाद से जुड़े मामलों पर कार्रवाई करती है।
पिछले कुछ वर्षों में अहमदाबाद से बांग्लादेशी नागरिकों, राजकोट से पश्चिम बंगाल के संदिग्धों और गुजरात से कश्मीर समेत अन्य राज्यों के आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ATS ने हरियाणा से उत्तर प्रदेश के एक संदिग्ध युवक को भी पकड़ा था।
जुलाई 2026 में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक कथित नेटवर्क के खिलाफ दो चरणों में बड़ी कार्रवाई की गई। 3 जुलाई को आठ आरोपियों और 17 जुलाई को पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ATS के अनुसार, इनमें पालनपुर, सिद्धपुर, पाटन के सरस्वती तालुका और वडगाम के निवासी शामिल थे।
हर आतंकी मॉड्यूल का अलग मोडस ऑपरेंडी
ATS अधिकारियों का कहना है कि पकड़े गए सभी मॉड्यूल का काम करने का तरीका अलग-अलग था। हालांकि एक समानता यह सामने आई कि हर मॉड्यूल में अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने और उनका कथित रूप से ब्रेनवॉश करने की कोशिश की जा रही थी।
नवंबर 2025 में ATS ने तीन लोगों को जहरीला पदार्थ रिसिन बनाने की कथित साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया था। वहीं 3 जुलाई 2026 को पकड़े गए आठ आरोपियों पर विस्फोट की योजना बनाने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क खड़ा करने के आरोप लगाए गए।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान साइबर आतंकवाद से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की गई थी। एजेंसियों ने ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया, जो देश की संवेदनशील सूचनाएं विदेशी संपर्कों तक पहुंचा रहे थे।
गुजरात के लोगों को डरने की जरूरत नहीं: ATS
DIG सुनील जोशी ने कहा कि गुजरात के लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय एजेंसियां, गुजरात ATS और अन्य सुरक्षा संस्थाएं आपसी तालमेल से काम कर रही हैं।
उनके अनुसार, संदिग्धों को किसी घटना को अंजाम देने से पहले पकड़ लिया जाना सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को दिखाता है। राज्य सरकार ने भी ATS को आतंकवाद से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए पूरी स्वतंत्रता दी है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य होने के कारण गुजरात निशाने पर?
सुरक्षा मामलों के जानकारों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य होने और गुजरात के आर्थिक विकास के कारण आतंकी संगठन राज्य को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए कई बार आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति की बात कर चुके हैं। अब उनके प्रधानमंत्री होने और गुजरात के औद्योगिक तथा आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य बनने के कारण आतंकी संगठनों द्वारा यहां माहौल बिगाड़ने की कोशिश किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के नेटवर्क को नुकसान पहुंचने के दावे भी किए गए। इसके बाद गुजरात में जैश के नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिशों को बदले की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
‘दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद’ नाम से संगठन बनाने का आरोप
ATS की जांच में सामने आया कि गुजरात में जैश-ए-मोहम्मद के लिए कथित रूप से “दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद” नाम से एक तंजीम तैयार की जा रही थी। तंजीम उर्दू भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ संगठन होता है।
3 जुलाई को पकड़े गए आठ आरोपियों पर इस तंजीम से जुड़कर अपने-अपने इलाकों में नए सदस्यों की भर्ती करने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और जैश का प्रभाव बढ़ाने के आरोप हैं।
ATS ने दावा किया कि संगठन के खतरनाक रूप लेने से पहले ही उसके नेटवर्क को तोड़ दिया गया।
पाकिस्तान स्थित हैंडलर से संपर्क का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी पाकिस्तान में मौजूद अब्दुल्ला और मोहम्मद उमर नाम के संदिग्ध हैंडलरों के संपर्क में थे। उन्हें कथित रूप से करीब तीन लाख रुपये की फंडिंग भी मिली थी।
आरोपियों की वडोदरा में जैश से जुड़े एक व्यक्ति के साथ बैठक होने की भी बात सामने आई। कुछ आरोपी मदरसों में पढ़ने और पढ़ाने का काम करते थे। उनके कब्जे से मोबाइल फोन, कथित कट्टरपंथी साहित्य और जैश-ए-मोहम्मद से संबंधित सामग्री बरामद होने का दावा किया गया है।
टाइम बम बनाने की कोशिश का आरोप
3 जुलाई को गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद पांच अन्य संदिग्धों के नाम सामने आए। इसके बाद ATS ने सिद्धपुर, वडगाम, पाटन और अन्य क्षेत्रों में कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार किया।
आरोपियों पर पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसी सामग्रियों से गन पाउडर तैयार करने का आरोप है। जांच में दावा किया गया कि ये सामग्री ऑनलाइन और स्थानीय बाजार से खरीदी गई थी।
आरोपियों ने कथित रूप से एक टाइमर डिवाइस भी खरीदा था। मामले के कथित मुख्य आरोपी मोहम्मद अमीन के पास से बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद हुई। मोहम्मद अयूब कड़ीवाला पर इस सामग्री से टाइम बम बनाने की कोशिश का आरोप है, हालांकि वह सफल नहीं हुआ।
जैश साहित्य और कराची से प्रकाशित किताबें बरामद
ATS ने आरोपियों के पास से उर्दू और अरबी भाषा में लिखा कथित जैश साहित्य बरामद किया। इनमें कुछ पुस्तकों पर मसूद अजहर का नाम संकलनकर्ता के रूप में लिखा होने का दावा किया गया।
एक पुस्तक के कवर पर मदीना, मस्जिद और धार्मिक संदेशों से संबंधित चित्र तथा उर्दू लेखन मौजूद था। अन्य पुस्तक में गाजा, वैश्विक राजनीति और धार्मिक संघर्ष से जुड़े संदर्भ बताए गए।
एक अन्य किताब का शीर्षक “जिहाद-ए-अफगानिस्तान की अनकही दास्तान” बताया गया है। इसके लेखक के रूप में मौलाना मुफ्ती मुहम्मद रफी उस्मानी का नाम और प्रकाशक के तौर पर कराची स्थित एक संस्थान का उल्लेख होने की बात कही गई।
रिसिन साजिश और ISKP कनेक्शन का दावा
नवंबर 2025 में ATS ने तीन आरोपियों को रिसिन नाम का जहरीला पदार्थ बनाने की कथित साजिश के आरोप में पकड़ा था। इनमें तेलंगाना के हैदराबाद निवासी अहमद मोइनुद्दीन, उत्तर प्रदेश के शामली निवासी आजाद शेख और लखीमपुर खीरी निवासी मोहम्मद सोहेल खान शामिल थे।
ATS के मुताबिक, आरोपी इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस यानी ISKP से जुड़े हुए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के संगठन कम लागत में अधिक नुकसान पहुंचाने वाले हमलों के नए तरीके तलाशते हैं।
ऐसे मॉड्यूल में सदस्य अक्सर एक-दूसरे को नहीं जानते। उनका संपर्क सीधे विदेशी हैंडलर से होता है और आवश्यकता पड़ने पर ही वे आपस में मिलते हैं।
2026 में गुजरात ATS की प्रमुख कार्रवाई
26 जनवरी 2026: नवसारी के चारपुल क्षेत्र से उत्तर प्रदेश के रामपुर निवासी फैजान शेख को गिरफ्तार किया गया। उस पर जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा की कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की योजना बनाने का आरोप था।
26 फरवरी 2026: अहमदाबाद के रखियाल क्षेत्र से रहमत अली शेख को गिरफ्तार किया गया। वह पंजाब में दर्ज हेरोइन, हैंड ग्रेनेड और हथियारों की तस्करी के मामले में वांछित था।
21 अप्रैल 2026: पाटन के सिद्धपुर निवासी इरफान कालेखान पठान और मुंबई निवासी मुर्शिद जाहिद अख्तर शेख को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर “गजवा-ए-हिंद” नाम से संगठन बनाने, युवाओं की भर्ती करने और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने की साजिश का आरोप लगाया गया।
14 मई 2026: मुंद्रा के कंटेनर फैसिलिटेशन स्टेशन से करीब 196.2 किलोग्राम कैप्टागन पाउडर बरामद किए जाने का मामला सामने आया। यह कंटेनर सीरिया से आयात किया गया था और कथित रूप से भेड़ की ऊन के नाम पर भेजा गया था।
3 जुलाई 2026: ATS ने जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क बनाने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें सात गुजरात और एक मध्य प्रदेश का निवासी बताया गया।
17 जुलाई 2026: पहले गिरफ्तार आठ आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पांच अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से विस्फोटक सामग्री और टाइमर से संबंधित उपकरण मिलने का दावा किया गया।
गुजरात में आतंकी नेटवर्क पर एजेंसियों की नजर
गुजरात ATS का कहना है कि राज्य को सॉफ्ट टारगेट नहीं कहा जा सकता। लगातार हो रही गिरफ्तारियां यह दिखाती हैं कि सुरक्षा एजेंसियां आतंकी गतिविधियों, विदेशी हैंडलरों, ऑनलाइन कट्टरपंथ और संदिग्ध फंडिंग पर करीबी नजर रख रही हैं।
हालांकि कम समय में सामने आए कई मॉड्यूल चिंता का विषय जरूर हैं। इन मामलों ने स्थानीय स्तर पर कट्टरपंथी नेटवर्क, सोशल मीडिया के जरिए ब्रेनवॉश और युवाओं की भर्ती जैसे खतरों को उजागर किया है।
फिलहाल ATS का दावा है कि सभी प्रमुख मॉड्यूल को किसी बड़ी घटना से पहले ही निष्क्रिय कर दिया गया है और गुजरात के नागरिकों को डरने की आवश्यकता नहीं है।
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