कश्मीर घाटी में बचे हुए कश्मीरी पंडितों को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के प्रॉक्सी ग्रुप TRF (The Resistance Front) से कथित जान से मारने की धमकियाँ मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट हो गई हैं। टारगेट किलिंग के लिए बनाए गए ऑपरेशनल मॉड्यूल ‘फाल्कन स्क्वाड’ के नाम से जारी एक लेटर ने घाटी में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
धमकी भरे पत्र से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘फाल्कन स्क्वाड’ के नाम से जारी पत्र में कश्मीरी पंडितों को चेतावनी दी गई है और राहुल पंडित, माखन लाल बिंदू समेत पूर्व टारगेट किलिंग घटनाओं का जिक्र किया गया है। पत्र में दावा किया गया कि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और चेतावनी को अंतिम बताया गया।

इसके अलावा 1990 के दशक में सक्रिय रहा ‘मुस्लिम जांबाज’ फोर्स भी कथित तौर पर फिर से सक्रिय हो गया है। घाटी के कुछ इलाकों में लगे पोस्टरों में उग्र संदेश लिखे मिलने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
मट्टन क्षेत्र में डर का माहौल
पहलगाम के पास मट्टन क्षेत्र में रहने वाले करीब 300 कश्मीरी पंडितों में भय का माहौल बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही सन्नाटा छा जाता है और पुलिस ने भी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है, जैसे अनजान कॉल न उठाना और रात में बाहर न निकलना।
सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं कश्मीरी पंडित समुदाय ने मांग की है कि उन्हें जम्मू के Village Defence Guards की तरह ट्रेनिंग और लाइसेंसी हथियार दिए जाएँ ताकि जरूरत पड़ने पर वे खुद की सुरक्षा कर सकें।
फिर उठी विस्थापन की आशंका
1990 के दशक में बड़े पैमाने पर विस्थापन के बाद कई कश्मीरी पंडित सरकारी योजनाओं के तहत घाटी लौटे थे। अब नई धमकियों के चलते एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। समुदाय के लोगों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में हालात अपेक्षाकृत शांत थे, लेकिन हालिया धमकियों ने फिर से डर का माहौल बना दिया है।
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