भारत सरकार ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का अभिन्न हिस्सा है तथा पाकिस्तान द्वारा वहां किसी भी प्रकार की चुनावी प्रक्रिया आयोजित करना भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है।
भारत ने एक बार फिर दोहराया कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है, वह भारतीय भूभाग है, जिस पर उसने अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है।
विदेश मंत्रालय का स्पष्ट बयान
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में चुनाव कराने के प्रयासों को पूरी तरह खारिज करता है।
मंत्रालय ने कहा:
- गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का अभिन्न हिस्सा है।
- जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय 1947 में कानूनी और अंतिम रूप से हो चुका था।
- पाकिस्तान को ऐसे क्षेत्रों में किसी प्रकार का प्रशासनिक या राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
- चुनाव कराने से वास्तविक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा।
1947 के विलय का दिया हवाला
भारत ने अपने बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर रियासत का भारत में विधिवत और स्थायी विलय 1947 में हुआ था। इसलिए सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान भारतीय क्षेत्र का हिस्सा हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों में बार-बार प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव करने की कोशिशें भारत की स्थिति को प्रभावित नहीं कर सकतीं।
पाकिस्तान के प्रयासों को किया खारिज
भारत ने कहा कि पाकिस्तान लगातार ऐसे कदम उठाता रहा है, जिनका उद्देश्य कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति को बदलना दिखाना है।
हालांकि भारत का कहना है कि:
- ऐसे कदमों का कोई कानूनी आधार नहीं है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति स्पष्ट और स्थिर है।
- चुनाव या प्रशासनिक पुनर्गठन से अवैध कब्जे को वैध नहीं बनाया जा सकता।
मानवाधिकार उल्लंघन का भी उठाया मुद्दा
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में मानवाधिकारों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की।
भारत का आरोप है कि:
- वहां राजनीतिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
- स्थानीय लोगों की आवाज को दबाया जाता है।
- आर्थिक और सामाजिक विकास प्रभावित होता है।
- नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित किया जाता है।
भारत ने कहा कि चुनाव जैसे कदम इन गंभीर मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास हैं।
पाकिस्तान से कब्जा समाप्त करने की मांग
भारत ने अपने बयान में दोहराया कि पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्रों पर अपना अवैध कब्जा समाप्त करना चाहिए।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की स्पष्ट और निरंतर नीति रही है कि पाकिस्तान को उन क्षेत्रों को खाली करना चाहिए, जिन पर उसने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।
क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ा महत्व
गिलगित-बाल्टिस्तान सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यह क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और हिमालयी भू-राजनीति के कारण लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रहा है।
भारत लगातार इस क्षेत्र को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है और पाकिस्तान द्वारा वहां किए जाने वाले प्रशासनिक या राजनीतिक कदमों का विरोध करता रहा है।
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