मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने मंगलवार (20 जनवरी 2026) को एक अहम फैसले में 2023 में त्रिची सिटी पुलिस द्वारा भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया। यह FIR तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए कथित बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप में दर्ज की गई थी।
जस्टिस एस. श्रीमथी ने कहा कि उदयनिधि का कथित बयान स्वयं ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी में आता है, ऐसे में उस पर सवाल उठाना अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी बताया कि उदयनिधि स्टालिन के बयान में तमिल शब्द ‘सनातन ओझिप्पु’ (उच्छेद/उन्मूलन) का प्रयोग किया गया है, न कि ‘एथिरप्पु’ (विरोध)। ‘ओझिप्पु’ का अर्थ किसी चीज को पूरी तरह समाप्त करना होता है। यदि इसे सनातन धर्म पर लागू किया जाए, तो इसका आशय धर्म के अनुयायियों के अस्तित्व को समाप्त करने से भी जोड़ा जा सकता है।
The Madurai Bench of the Honourable Madras High Court has quashed the vindictive and politically motivated FIR filed by the corrupt, anti-Hindu DMK government against Thiru @amitmalviya avl, National In-Charge of the @BJP4India’s IT Department.
The Court categorically observed…
— K.Annamalai (@annamalai_k) January 21, 2026
जज ने कहा कि यह ‘जेनोसाइड’ या ‘रिलिजियोसाइड’ जैसे गंभीर अर्थों तक जाता है और इसी पृष्ठभूमि में मालवीय की पोस्ट को हेट स्पीच नहीं कहा जा सकता। अमित मालवीय ने सितंबर 2023 में चेन्नई में आयोजित एक सम्मेलन में उदयनिधि के बयान का हवाला देते हुए X पर पोस्ट किया था कि मंत्री ने सनातन की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी और कहा कि कोरोना, डेंगू और मलेरिया जैसे सामाजिक नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं, वैसे ही सनातन धर्म भी मनुष्यों के लिए हानिकारक है।
मालवीय ने इस पोस्ट में सवाल उठाया कि क्या इसका मतलब भारत की 80% आबादी के खिलाफ नरसंहार की बात है। जज ने टिप्पणी की, “उन्होंने किसी से भी मंत्री या उनकी पार्टी के खिलाफ कोई आंदोलन शुरू करने का आग्रह नहीं किया है, बल्कि केवल तथ्य प्रस्तुत किए हैं और मंत्री से प्रश्न किया है। याचिकाकर्ता का पोस्ट प्रश्न के रूप में है और उत्तर की माँग कर रहा है, और इस पर दंड संहिता की कोई धारा लागू नहीं होती।”
उदयनिधि ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा, “मैंने कभी भी सनातन धर्म का पालन करने वाले लोगों के नरसंहार का आह्वान नहीं किया। सनातन धर्म को जड़ से उखाड़ फेंकना मानवता और मानवीय समानता को कायम रखना है।”
वहीं शिकायतकर्ता और DMK के अधिवक्ता विंग के आयोजक केएवी दिनाकरन ने आरोप लगाया कि मालवीय ने जानबूझकर बयान को गलत तरीके से पेश कर लोगों को भड़काने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अमित मालवीय के नेतृत्व में भाजपा लगातार यह वीडियो वायरल कर रही है, जिससे भाईचारा कमजोर हो रहा है। इस शिकायत पर त्रिची पुलिस ने अमित मालवीय पर IPC की धारा 153, 153(A), 504 और 505 के तहत मामला दर्ज किया था।
अंत में जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “कोर्ट बड़े दुख के साथ यह स्थिति दर्ज करती है कि नफरत फैलाने वाले भाषण देने वालों को तो बरी कर दिया जाता है, लेकिन उन पर प्रतिक्रिया देने वालों को कानून के शिकंजे में फँसा लिया जाता है। कोर्ट प्रतिक्रिया देने वालों से भी पूछताछ कर रही है, लेकिन नफरत फैलाने वाले भाषण देने वाले के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही।” इस मामले में मंत्री के खिलाफ राज्य में नफरत फैलाने वाले भाषण के लिए कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, हालांकि अन्य राज्यों में कुछ मामले दर्ज किए गए हैं।
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