बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने 12 फरवरी 2026 को देश में आम चुनाव कराने का ऐलान किया है। शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के बाद यह पहला चुनाव होगा। इस बार लगभग 12.8 करोड़ मतदाता 300 सीटों पर अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी, क्योंकि सरकार ने उस पर प्रतिबंध लगा दिया है। आवामी लीग ने इस चुनाव को ‘गैर-कानूनी’ बताते हुए अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
बांग्लादेश में चुनावी प्रक्रिया भारत की तरह ही पांच साल में एक बार होती है। यहाँ की संसद को जातीय संसद कहा जाता है, जिसमें कुल 350 सीटें हैं। इनमें से 300 सीटों पर सीधे जनता वोट देती है। इन सांसदों का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है और इन्हीं सीटों पर मुख्य मुकाबला माना जाता है। बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिन पर सीधा चुनाव नहीं होता। 300 सीटों के परिणाम आने के बाद, जिस पार्टी या गठबंधन के पास सबसे ज्यादा सीटें होती हैं, उसे उसी अनुपात में महिलाओं को नामित करने का अधिकार मिलता है। इस व्यवस्था से संसद में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित रहती है।
जब चुनाव परिणाम घोषित होते हैं और यह स्पष्ट हो जाता है कि किस पार्टी या गठबंधन को बहुमत मिला है, तब उस समूह के चुने हुए सांसद अपना नेता चुनते हैं। यही नेता आगे चलकर प्रधानमंत्री बनता है और सरकार का गठन करता है।
चुनाव कार्यक्रम भी तय कर दिया गया है। उम्मीदवार 29 दिसंबर 2025 तक अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। यदि कोई उम्मीदवार चुनाव से हटना चाहता है, तो वह 20 जनवरी 2026 तक अपना नाम वापस ले सकता है। इसके बाद प्रचार समाप्त होगा और 12 फरवरी 2026 को मतदान होगा। वोटिंग सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक होगी।
इस बार का चुनाव बेहद खास है, क्योंकि आवामी लीग की अनुपस्थिति में मुकाबला कई अन्य बड़े दलों के बीच होगा। मुख्य टक्कर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी, कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी, और हाल के छात्र आंदोलन से उभरी नई एनसीपी (NCP) पार्टी के गठबंधन के बीच होने की उम्मीद है। यह गठबंधन हसीना के पतन के बाद राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आखिरी चुनाव 7 जनवरी 2024 को हुए थे, जिसमें शेख हसीना की पार्टी ने जीत हासिल की थी। लेकिन 2024 में उभरे बड़े छात्र आंदोलन, हिंसक प्रदर्शनों और सेना के दबाव के चलते शेख हसीना को अगस्त 2024 में इस्तीफा देना पड़ा और वे भारत चली गईं। इसके बाद उनकी पार्टी को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया।
1971 में स्वतंत्रता के बाद यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार संसद चुनाव और राष्ट्रीय जनमत-संग्रह एक ही दिन होंगे। पहली बार आवामी लीग पूरी तरह चुनाव से बाहर है। जनमत-संग्रह के जरिए न्यायपालिका और चुनाव आयोग को और अधिक स्वतंत्र बनाने जैसे बड़े सुधारों पर जनता की राय ली जाएगी। इस वजह से यह चुनाव बांग्लादेश की राजनीतिक और संस्थागत व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
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