यूपी में एक बार फिर एस्मा लागू कर दिया गया है, जिसका मतलब है कि अब कोई भी आवश्यक सेवाओं से जुड़ा सरकारी कर्मचारी काम करने से इंकार नहीं कर सकता। अगर कोई कर्मचारी काम रोकता है या हड़ताल पर जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें 6 महीने की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। सरकार ने यह कदम आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए उठाया है।
राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, उत्तर प्रदेश आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम, 1966 की धारा 3(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 6 महीने की अवधि के लिए हड़ताल पर रोक लगा दी गई है। प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम. देवराज ने 12 दिसंबर 2025 को इसकी आधिकारिक घोषणा की। अब अगले 6 महीने तक सरकारी कर्मचारी हड़ताल शुरू करने, उसमें भाग लेने या उसे जारी रखने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई हड़ताल को आर्थिक मदद करता पाया गया, तो उसे 1 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
एस्मा यानी आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम एक ऐसा कानून है, जिसके तहत सरकार किसी भी महत्वपूर्ण सेवा में बाधा डालने वाली हड़ताल को अवैध घोषित कर सकती है। एस्मा का उद्देश्य आम जनता को मिलने वाली जरूरी सेवाओं—जैसे बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा और बैंकिंग—को बिना रुकावट जारी रखना होता है। यह आमतौर पर 6 महीने के लिए लागू किया जाता है, हालांकि जरूरत पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश में अगले 6 महीने के लिए एस्मा लागू कर दिया गया है। अब सरकारी कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे। सरकार ने यह फैसला आवश्यक सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए लिया है। एस्मा लागू होने से राज्य सरकार को आवश्यक सेवाओं में व्यवधान को रोकने में मदद मिलेगी। pic.twitter.com/SmPrgrh6Rl
— Bhadohi Wallah (@Mithileshdhar) December 12, 2025
सरकार के आदेश के मुताबिक, यह प्रतिबंध राज्य सरकार के सभी विभागों, कार्यालयों, स्थानीय निकायों, निगमों, बोर्डों और प्राधिकरणों पर लागू होगा। यानी स्वास्थ्य सेवाएँ, बिजली और जल आपूर्ति, पुलिस व सुरक्षा व्यवस्था, परिवहन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के विभागों में काम बंद करना एस्मा के तहत दंडनीय होगा। अगर कोई कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हड़ताल पर रोक लगाने की मुख्य वजह यह है कि बिजली विभाग और शिक्षा विभाग के कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल की चेतावनी दे रहे थे। जून 2025 में भी बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों ने हड़ताल की घोषणा की थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने एस्मा लागू किया था। यह 6 महीने की अवधि पूरी होने पर अब दोबारा बढ़ा दिया गया है, ताकि महत्वपूर्ण सेवाओं पर कोई असर न पड़े।
मुख्य सचिव एम. देवराज ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आवश्यक सेवाओं को सुचारू रूप से चलाना है। यदि कर्मचारियों को कोई समस्या है, तो उसका समाधान प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। हड़ताल को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, एस्मा लागू करना सरकार का कानूनी अधिकार है जो कर्मचारियों के अधिकारों को सीमित नहीं करता, बल्कि आम जनता की जरूरतों को प्राथमिकता देता है।
देश के कई राज्यों में पहले भी एस्मा लागू किया जा चुका है। यूपी में इसे जून 2025 में लागू किया गया था, जिसे अब 6 महीने और बढ़ा दिया गया है। हरियाणा में 2022 में कोविड अवधि के दौरान डॉक्टरों की हड़ताल रोकने के लिए एस्मा लगाया गया था। कर्नाटक में इसे 2015 और उससे पहले 1994 में लागू किया गया था। केरल में 1993 में एस्मा लागू हुआ और बाद में बढ़ाया गया। राजस्थान में इसे RESMA के नाम से जाना जाता है। दिल्ली में भी डॉक्टरों की हड़ताल के समय एस्मा लागू किया गया था, जिसके बाद हड़ताल समाप्त हो गई।
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