लखनऊ के सीतापुर जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) और एक प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक के बीच हुए विवाद, जिसे अब “बेल्ट कांड” कहा जा रहा है, में शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में दोषी पाए गए बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, प्रधानाध्यापक बृजेंद्र कुमार वर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस पूरे विवाद ने अब शिक्षा विभाग और स्थानीय स्तर पर जोरदार हलचल मचा दी है।
BSA सीतापुर अखिलेश सिंह – बेल्ट कांड मामला –
बेल्ट चलाने वाले शिक्षक जेल में हैं,
अपने ऊपर आरोप लगने के बाद BSA ने
महिला शिक्षिका को निलंबित कर दिया है , BSA की भूमिका पूर्णतया संदिग्ध है , सख्त जाँच /कार्रवाई की दरकार है , उच्चाधिकारी सन्नाटे में हैं !! pic.twitter.com/VyTH305Ikz
— Gaurav Singh Sengar (@sengarlive) September 25, 2025
विवाद के किरदार
इस घटना में कई नाम सीधे तौर पर सामने आए हैं।
- अखिलेश प्रताप सिंह – निलंबित बीएसए, जिन पर आरोप है कि वे शिक्षिका की फर्जी हाजिरी लगाने का दबाव बना रहे थे।
- बृजेंद्र कुमार वर्मा – प्रधानाध्यापक, जिन्होंने बीएसए की पिटाई की और अब जेल में हैं।
- अवंतिका गुप्ता – महिला शिक्षिका, जिनकी फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने का विवाद चल रहा था; उन्हें पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
विवाद की जड़
जानकारों के मुताबिक, बीएसए ने प्रधानाध्यापक बृजेंद्र वर्मा पर शिक्षिका अवंतिका गुप्ता की फर्जी हाजिरी दर्ज करने का दबाव बनाया था। इसी को लेकर दोनों के बीच तनातनी बढ़ती चली गई। जब प्रधानाध्यापक सफाई देने बीएसए कार्यालय पहुँचे, तो माहौल बिगड़ गया।
मारपीट की घटना
यह विवाद 23 सितंबर को चरम पर पहुँचा। बृजेंद्र वर्मा अपनी सफाई देने कार्यालय आए थे, लेकिन बात बिगड़ गई। बहस के दौरान गुस्से में आकर उन्होंने मेज पर फाइल पटकी और बेल्ट निकालकर बीएसए की पिटाई कर दी। चंद सेकेंड में ही बीएसए को पाँच बार बेल्ट से मारा गया। यह पूरा वाकया वीडियो में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
ग्रामीणों और बच्चों का समर्थन
बीएसए की शिकायत पर पुलिस ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें जेल भेज दिया। लेकिन गाँव के लोगों और छात्रों ने इसका जमकर विरोध किया। ग्रामीणों ने स्कूल में ताला डाल दिया और बच्चों ने पढ़ाई से इनकार कर दिया। वे हेडमास्टर की रिहाई की मांग पर अड़े हुए हैं। अभिभावक और बच्चे दोनों ही मानते हैं कि हेडमास्टर निर्दोष हैं और उन्हें अन्यायपूर्ण तरीके से फँसाया गया है।
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