आतंकवाद के खिलाफ भारत के निर्णायक अभियान ऑपरेशन सिंदूर ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) को गहरी चोट पहुँचाई है। इस बात को अब खुद आतंकी संगठन के शीर्ष कमांडर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुख्यात लश्कर कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने कबूल किया है कि मुरिदके स्थित मरकज-ए-तैयबा भारतीय कार्रवाई में पूरी तरह नष्ट हो गया है।
यह वही परिसर है, जिसे पाकिस्तान लंबे समय से एक मजहबी और चैरिटी केंद्र बताता रहा है, जबकि भारत इसे लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी मुख्यालय मानता रहा है। अब खुद लश्कर के कमांडर ने इस दावे की पुष्टि कर दी है। रऊफ के अनुसार, यहीं आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती थी और इसे संगठन का ‘नर्व सेंटर’ माना जाता था।
लश्कर-ए-तैयबा का बड़ा कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने कबूला—‘ऑपरेशन सिंदूर’ से हम बाल-बाल बचे, अल्लाह की मेहरबानी से!
पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने खुद स्वीकार किया है कि भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक भयंकर हमला था, जिसमें वे और उनके साथी… pic.twitter.com/rP6M3f6G0w
— One India News (@oneindianewscom) January 16, 2026
‘अब वहाँ बैठ भी नहीं सकते’
एक सार्वजनिक सभा में बोलते हुए हाफिज अब्दुल रऊफ ने कहा कि 6 और 7 मई 2025 की रात भारत द्वारा किए गए हवाई और सैन्य हमलों में मरकज-ए-तैयबा मलबे में तब्दील हो गया। उसने कहा,
“6-7 मई को जो हुआ, वह बहुत बड़ा हमला था। वह जगह अब मस्जिद नहीं रही। आज हम वहाँ बैठ भी नहीं सकते। सब खत्म हो चुका है, सब ढह गया है।”
यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पहली बार लश्कर के किसी शीर्ष नेता ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि भारत का हमला पूरी तरह सफल रहा। रऊफ कोई मामूली चेहरा नहीं है, बल्कि वह आतंकियों की ट्रेनिंग और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लॉन्च पैड्स के जरिए उन्हें भारत भेजने की गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल रहा है।
पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर
भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। जाँच में सामने आया कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के नाम से अंजाम दिया था, जो लश्कर का ही मुखौटा संगठन है।
जाँच एजेंसियों को आतंकियों के पास से चीनी हथियार और आधुनिक सैन्य साजो-सामान भी मिले थे, जिससे पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने की पुष्टि हुई। अब रऊफ ने खुद यह स्वीकार किया है कि संघर्ष के दौरान लश्कर और पाकिस्तान की ओर से चीनी हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।
पाकिस्तान में भर्ती और ट्रेनिंग का खुला कबूलनामा
अपने बयान में रऊफ ने एक और चौंकाने वाला दावा किया। उसने कहा कि पाकिस्तान में जिहाद के लिए खुली छूट है और वहाँ आतंकियों की भर्ती और ट्रेनिंग दुनिया में सबसे आसान है। रऊफ के शब्दों में,
“देश ने फैसला किया है, इसलिए हम यह सब कर पा रहे हैं।”
यह बयान भारत के उस लंबे समय से लगाए जा रहे आरोप को और मजबूत करता है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को सिर्फ बर्दाश्त ही नहीं किया जाता, बल्कि उन्हें संस्थागत समर्थन भी मिलता है। रऊफ ने चीन की तारीफ करते हुए यह भी दावा किया कि पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान बीजिंग ने पाकिस्तान को रीयल-टाइम खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई।
कूटनीतिक दबाव में पाकिस्तान
गौर करने वाली बात यह है कि 15 जनवरी 2026 को मरकज-ए-तैयबा में नए आतंकियों की पासिंग आउट परेड हुई थी, जिसमें खुद हाफिज अब्दुल रऊफ, हाफिज सईद का बेटा हाफिज तल्हा सईद और लश्कर का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी मौजूद थे। अब उसी परिसर के पूरी तरह नष्ट होने की बात रऊफ ने खुद स्वीकार कर ली है।
रऊफ का यह कबूलनामा पाकिस्तान के लिए बड़ी कूटनीतिक मुश्किल खड़ी कर सकता है, क्योंकि जिन आरोपों को वह वर्षों से खारिज करता रहा, उनकी पुष्टि अब किसी खुफिया एजेंसी ने नहीं, बल्कि खुद लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर ने कर दी है।
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