अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के राजनीति विज्ञान विभाग की सीनियर प्रोफेसर रचना कौशल ने कॉलेज के डीन प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला प्रोफेसर का कहना है कि उन्हें वर्षों तक सिर्फ हिंदू होने की वजह से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनका आरोप है कि डीन लगातार उन पर दबाव बनाते रहे कि वे AMU छोड़कर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) चली जाएँ।
प्रोफेसर रचना कौशल का कहना है कि धार्मिक पहचान के आधार पर उनके साथ भेदभाव किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रो. अंसारी ने उन्हें बार-बार यह अहसास कराया कि एक मुस्लिम बहुल संस्थान में उनके लिए कोई जगह नहीं है। उनके अनुसार, यह मानसिक उत्पीड़न लंबे समय से चलता आ रहा है।
महिला प्रोफेसर ने बताया कि भेदभाव का यह सिलसिला उनकी 1998 में नियुक्ति के कुछ समय बाद ही शुरू हो गया था। उन्होंने एक दर्दनाक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 2004 में गर्भावस्था के दौरान उन पर इतना अधिक काम का दबाव डाला गया कि उनका गर्भपात (मिसकैरेज) हो गया।
अलीगढ़ AMU में हिन्दू प्रोफेसर ने विभागाध्यक्ष पर उत्पीड़न का आरोप लगाया
प्रो. रचना कौशल का कहना है कि प्रो. नफीस अंसारी उन्हें बदनाम कर रहे हैं
मुस्लिम बच्चों में भेदभाव का झूठा आरोप लगाकर मानसिक उत्पीड़न
"27 साल की नौकरी में हिन्दू होने के कारण लगातार उत्पीड़न"
प्रो. नफीस… pic.twitter.com/UVKdquu6ap
— One India News (@oneindianewscom) January 8, 2026
उन्होंने यह भी बताया कि 2012 में पति के निधन के बाद वह और अधिक अकेली पड़ गईं। ऐसे समय में संवेदनशीलता दिखाने के बजाय विभाग की ओर से उन्हें और भी अलग-थलग किया गया।
प्रोफेसर रचना कौशल का आरोप है कि डीन प्रो. अंसारी ने उनसे यह तक कहा कि “हिंदू शिक्षक जानबूझकर मुस्लिम छात्रों को ठीक से नहीं पढ़ाते।” उनका दावा है कि उन्हें विभागीय बैठकों से बाहर रखा गया, उनकी जिम्मेदारियाँ छीनी गईं और सार्वजनिक रूप से उनकी नियुक्ति को ‘अवैध’ बताकर उनके मान-सम्मान को ठेस पहुँचाई गई।
महिला प्रोफेसर ने कहा कि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कुलपति को ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजी सबूत भी सौंपे हैं। इसके अलावा, उनका आरोप है कि उनका प्रमोशन जानबूझकर वर्षों तक रोका गया, जिसके लिए उन्हें हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत के आदेश के बाद ही उन्हें उनका अधिकार मिला।
प्रोफेसर रचना कौशल ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द न्याय नहीं दिया, तो वे पुलिस में FIR दर्ज कराएँगी। वहीं दूसरी ओर, डीन प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है और कहा है कि वे अपना पक्ष कुलपति के सामने रखेंगे।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel