देश के बड़े व्यापार समूह अडानी ग्रुप और ब्राजील की प्रमुख विमान कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) ने एक ऐतिहासिक साझेदारी की घोषणा की है। इस साझेदारी के तहत भारत में पहली बार ‘रीजनल जेट’ विमान बनाए जाएंगे। यह कदम भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल करेगा, जहाँ कमर्शियल विमान असेंबली लाइन (FAL) स्थापित है।
इस समझौते के अनुसार, एम्ब्रेयर के 70 से 146 यात्रियों के लिए छोटे और मध्यम दूरी पर उड़ान भरने वाले लोकप्रिय विमानों को भारत में ही असेंबल किया जाएगा। यह सहयोग भारत के विमानन क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे देश में विमान निर्माण की क्षमता और विशेषज्ञता दोनों बढ़ेंगी।
अडानी ग्रुप और एम्ब्रेयर भारत में क्षेत्रीय जेट विमान बनाएंगे
🔹 अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर के साथ समझौता किया।
🔹 यह पहली बार है जब कोई निजी भारतीय कंपनी कमर्शियल फिक्स्ड-विंग विमान का निर्माण करेगी।
🔹 यह साझेदारी E190-E2 और E195-E2… pic.twitter.com/AJBVPYK36X
— One India News (@oneindianewscom) January 8, 2026
अडानी एयरोस्पेस ने पिछले साल 2025 में ब्राजील में एम्ब्रेयर के साथ एक MoU पर हस्ताक्षर किए थे। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक-इन-इंडिया’ योजना को विमानन क्षेत्र में मजबूती देगा। हालांकि, अभी विमान बनाने की जगह, निवेश और उत्पादन के शुरू होने के समय का औपचारिक ऐलान इसी महीने हैदराबाद एयर शो में किया जाना है।
सरकार ने भी इस कदम को जरूरी माना है। भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ विमानन बाजार है, और यहाँ 1800 से ज्यादा विमान पहले ही एयर इंडिया ग्रुप, इंडिगो और अकासा समेत कई भारतीय एयरलाइंस द्वारा ऑर्डर किए जा चुके हैं। सरकार का मानना है कि अगर भारत में विमानों की असेंबली होती है, तो यह एयरबस और बोइंग जैसे बड़े वैश्विक निर्माताओं को भी भारत में निवेश करने के लिए आकर्षित करेगा।
एयरलाइन कंपनियों के लिए यह बड़ी खबर साबित होगी, क्योंकि भारत में बने विमान स्थानीय उड़ान सेवाओं के लिए बेहतर समर्थन दे सकते हैं। मौजूदा समय में स्टार एयर (Star Air) जैसे विमानन ऑपरेटर पहले से ही एम्ब्रेयर के विमान इस्तेमाल करते हैं, और इस कदम के बाद बड़े ऑर्डर का संकेत मिल रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस साझेदारी से भारत में नौकरी के अवसर, विमान निर्माण का नेटवर्क और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी। साथ ही यह कदम दक्षिण एशिया में विमानन क्षेत्र को मजबूत करने में भी मदद करेगा।
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