मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सीनेट ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से जुड़ी शक्तियों को सीमित करना था। इस फैसले के बाद राष्ट्रपति Donald Trump को अपनी मौजूदा सैन्य रणनीति जारी रखने में तत्काल कोई कानूनी बाधा नहीं रहेगी।
क्यों लाया गया था प्रस्ताव?
यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक सीनेटर Tim Kaine और रिपब्लिकन सीनेटर Rand Paul ने मिलकर पेश किया था। प्रस्ताव का मुख्य तर्क यह था कि यदि अमेरिकी संसद (कॉन्ग्रेस) औपचारिक रूप से युद्ध की अनुमति नहीं देती, तो सेना को ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई से वापस बुलाया जाना चाहिए।
विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति ने हवाई हमलों का आदेश देते समय संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया और संसद को भरोसे में नहीं लिया। उनका कहना है कि युद्ध जैसे गंभीर फैसलों में कॉन्ग्रेस की मंजूरी आवश्यक है।
सीनेट में कैसे गिरी पहल?
सीनेट में मतदान के दौरान रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत निर्णायक साबित हुआ। सीनेट में 53-47 के बहुमत के साथ रिपब्लिकन पार्टी ने एकजुट होकर राष्ट्रपति के पक्ष में मतदान किया। परिणामस्वरूप प्रस्ताव गिर गया और विपक्ष की कोशिश नाकाम रही।
यह वोटिंग ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंकाएं बनी हुई हैं।
ठोस सबूतों पर उठे सवाल
सीनेटर टिम केन ने एक गोपनीय ब्रीफिंग के बाद प्रशासन की दलीलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कोई स्पष्ट और ठोस प्रमाण नहीं दिखाया गया, जिससे यह साबित हो सके कि ईरान से अमेरिका को तत्काल खतरा था, जिसके चलते बिना कॉन्ग्रेस की अनुमति के सैन्य कार्रवाई जरूरी थी।
इस मुद्दे ने अमेरिका में राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों और कॉन्ग्रेस की भूमिका को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है।
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