Mohan Bhagwat ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मेरठ में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए निस्वार्थ सेवा और उत्कृष्ट कार्य के “पांच मंत्र” दिए। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता कोई भी अच्छा काम प्रमाणिकता और निस्वार्थ भाव से करें—“टिकट या सीट की मांग नहीं, नेकी करो और कुएं में डालो।”
उन्होंने कहा कि देशहित में उत्कृष्टता (Excellence) के साथ काम करें। “आपको संघ का नाम भी न पता हो, तब भी आपके काम के आधार पर आपको संघ का सदस्य बनाया जा सकता है,” उन्होंने जोड़ा।
सामाजिक समरसता और जाति उन्मूलन पर जोर
इससे पहले लखनऊ में संघ प्रमुख ने सामाजिक समरसता, जाति उन्मूलन और सांस्कृतिक एकता को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार बताया। उन्होंने कहा, “हम सब भारत माता के पुत्र हैं, सहोदर हैं, और हम हिंदू हैं—यही भाव अस्पृश्यता और जातीय विभाजन को समाप्त करेगा।”
भागवत ने स्पष्ट किया कि आधुनिकता का विरोध नहीं, बल्कि अंधानुकरण का विरोध है। “जो नया है, उसे परखकर स्वीकार करें; शाश्वत मूल्यों के अनुरूप परिवर्तन ही उचित है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि समाज यदि जागृत और समरस रहेगा तो राजनीतिक विकृतियां स्वतः कम होंगी।
UGC रेगुलेशन पर संतुलित रुख
Rashtriya Swayamsevak Sangh प्रमुख ने UGC रेगुलेशन पर कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए पूर्वानुमान आधारित प्रतिक्रिया उचित नहीं। समाज में विभाजन न हो, इसका ध्यान रखना आवश्यक है।
उत्तराखंड में शताब्दी वर्ष कार्यक्रम
भागवत 22-23 फरवरी को उत्तराखंड के दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी वर्ष के तहत प्रदेशभर में 1,000 हिंदू सम्मेलनों का लक्ष्य रखा गया है। इसे संगठन विस्तार और सामाजिक संवाद के व्यापक अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
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