राजस्थान के Ajmer से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित दौराई गांव में इस बार ईद-उल-फितर का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है। जहां हर साल ईद पर खुशियां, रौनक और चहल-पहल देखने को मिलती थी, वहीं इस बार गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
गांव में बड़ी संख्या में रहने वाले शिया समुदाय के लोगों ने इस बार ईद का त्योहार नहीं मनाने का फैसला लिया है। इसकी वजह ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर को बताया जा रहा है, जिससे पूरे समुदाय में गहरा शोक है।
शोक में डूबा पूरा गांव
समुदाय के लोगों का कहना है कि जब तक खामेनेई के अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक किसी भी तरह का जश्न मनाना उचित नहीं है।

हर साल ईद के मौके पर दौराई गांव में बाजारों में भीड़, घरों में सेवइयां और मिठाइयों की खुशबू, बच्चों के नए कपड़े और सड़कों पर सजावट देखने को मिलती थी, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं।
काली पट्टी बांधकर जताया जाएगा शोक
गांव के लोग काली पट्टी बांधकर शोक व्यक्त करने की तैयारी कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के उत्सव से दूरी बना रहे हैं।
मस्जिद में आयोजित हुई शोक सभा
दौराई गांव की रोजा मस्जिद में मौलाना इरफान हैदर के नेतृत्व में शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान खामेनेई को श्रद्धांजलि दी गई और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया।
मौलाना इरफान हैदर ने कहा कि यह समय जश्न का नहीं बल्कि दुख और आत्ममंथन का है, इसलिए समाज सादगी और शोक के साथ यह समय बिताएगा।
इस फैसले के बाद पूरे इलाके में ईद का उत्साह फीका पड़ गया है और हर तरफ मातम जैसा माहौल देखने को मिल रहा है।
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