नेपाल में इन दिनों दो अलग-अलग घटनाओं ने देश की कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था को गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। एक ओर वीरगंज में डॉक्टर पर हमले के विरोध में देशभर के डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं, जबकि दूसरी ओर भारत से सटे सुनसरी जिले में सांप्रदायिक हिंसा भड़कने के बाद कई इलाकों में कर्फ्यू लागू करना पड़ा है।
डॉक्टर पर हमले के बाद देशव्यापी हड़ताल
पूरा विवाद 25 जुलाई 2026 को वीरगंज स्थित नारायणी अस्पताल से शुरू हुआ। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान 45 वर्षीय हृदय रोगी की मौत हो गई थी। मरीज की मौत से नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर प्रमोद राम के साथ मारपीट कर दी। हमले में डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद उन्हें काठमांडू के नेशनल ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार अब उनकी स्थिति खतरे से बाहर है।
घटना के विरोध में 26 जुलाई से वीरगंज के डॉक्टर हड़ताल पर बैठ गए और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करने लगे। 27 जुलाई को पर्सा जिला प्रशासन कार्यालय में प्रमुख जिला अधिकारी भोला दाहाल की मौजूदगी में डॉक्टरों और प्रशासन के बीच वार्ता हुई, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही।
डॉक्टरों का आरोप है कि बैठक समाप्त होने के बाद जिला पुलिस प्रमुख एसपी सुदीप राज पाठक ने उन्हें दोबारा बैठक कक्ष में ले जाने की कोशिश की, जिससे पुलिस और डॉक्टरों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इस घटना के बाद डॉक्टरों का आक्रोश और बढ़ गया।
इसके बाद नारायणी अस्पताल के 70 से अधिक डॉक्टरों में से 65 डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंप दिया। नेपाल मेडिकल एसोसिएशन ने भी देशभर में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद रखने का ऐलान कर दिया।
लाखों मरीजों पर पड़ा असर
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीर अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 4,000 मरीज, त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में 4,000 से अधिक और पाटन अस्पताल में करीब 3,000 मरीज ओपीडी सेवाओं का लाभ लेते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में रोजाना तीन लाख से अधिक मरीज विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मंगलवार को लाखों मरीजों को इलाज नहीं मिल सका। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का बंद होना संविधान के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। वहीं कंज्यूमर राइट्स प्रोटेक्शन फोरम ने भी डॉक्टरों से वैकल्पिक तरीके से विरोध दर्ज कराने और सेवाएं बहाल करने की अपील की है।
हालांकि नेपाल मेडिकल एसोसिएशन ने आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया है और नारायणी अस्पताल में सेवाएं लगातार तीसरे दिन भी प्रभावित रहीं।
सुनसरी में सांप्रदायिक हिंसा, एक की मौत
नेपाल के सुनसरी जिले में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 26 जुलाई की रात देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज क्षेत्र में मंदिर के बाहर तेज आवाज में डीजे बजाने और धार्मिक झंडों को लेकर विवाद शुरू हुआ।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इससे पहले एक बिजली के खंभे पर लगे मुस्लिम समुदाय के झंडे को हटाकर हिंदू झंडा लगाए जाने को लेकर भी दोनों समुदायों के बीच तनाव था। दोनों पक्ष अपने-अपने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे थे, तभी लाउडस्पीकर और झंडे को लेकर विवाद बढ़ गया और पत्थरबाजी शुरू हो गई।
स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर पुलिस ने पहले हवाई फायरिंग की। हालात नहीं संभलने पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली चलानी पड़ी। इस दौरान 24 वर्षीय ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत करीब दो दर्जन लोग घायल हो गए। दो घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
कई इलाकों में कर्फ्यू लागू
हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने हरिनगर और देवांगंज ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्रों में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए। हरिनगर, भुटाहा, कप्तानगंज, घुसकी और देवांगंज समेत पांच प्रमुख बाजार क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया गया है।
मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी प्रतिबंध जारी रहे। प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए पूर्व-पश्चिम राजमार्ग वाले हिस्से में सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी, लेकिन इसके बाद पुनः कर्फ्यू लागू कर दिया गया।
नेपाल में एक साथ स्वास्थ्य संकट और सांप्रदायिक तनाव ने सरकार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर लाखों मरीज इलाज के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर सुनसरी में शांति व्यवस्था बहाल करना प्रशासन की प्राथमिकता बन गया है।
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