राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरे अभियान में भारत को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि “हमारे नुकसान की एक भी तस्वीर सामने नहीं आई है, जबकि आप सभी ने पाकिस्तान के 13 एयरबेस की तबाही की तस्वीरें जरूर देखी होंगी।” डोभाल ने विदेशी मीडिया की आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि “हमें गर्व है कि हमने इस ऑपरेशन में स्वदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया और महज 23 मिनट में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया।”
इससे पहले भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने भी ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक सफलता पर प्रकाश डाला था। उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान भारत एक साथ कई मोर्चों पर दुश्मनों से जूझ रहा था। पाकिस्तान तो केवल एक चेहरा था — असल में उसके पीछे चीन और तुर्किए जैसे देश भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। चीन पाकिस्तान को रियल-टाइम सैटेलाइट इंटेलिजेंस, हथियार, और रणनीतिक सहायता दे रहा था, जबकि तुर्किए ने उसे ड्रोन और प्रशिक्षित ऑपरेटरों की मदद दी।
जनरल सिंह के अनुसार, पाकिस्तान के सैन्य साजो-सामान का 81% हिस्सा चीन से आता है, और चीन इस तरह के युद्धकालीन हालातों का इस्तेमाल अपने हथियारों की परख और “लाइव वॉर लैब” की तरह करता है। इसके बावजूद, भारत ने न केवल तकनीकी रूप से श्रेष्ठता दिखाई, बल्कि दुश्मनों को निर्णायक जवाब देकर कड़ा सबक सिखाया, जिसे पाकिस्तान अब तक नहीं भूला है।
ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी दिखा दिया कि भारत अब सिर्फ प्रतिक्रिया देने वाला नहीं, बल्कि सटीक और रणनीतिक तरीके से हमले करने की क्षमता रखने वाला राष्ट्र बन चुका है — और वह भी स्वदेशी सैन्य शक्ति और उच्चस्तरीय खुफिया के दम पर।