राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के खिलाफ कथित मानहानिकारक और आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में बेंगलुरु की अदालत ने कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद हारीस नलपाड के खिलाफ संज्ञान लिया है। अदालत ने दोनों नेताओं को 21 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया है।
यह मामला बेंगलुरु के सिद्धापुरा निवासी और RSS कार्यकर्ता ए. तेजस की निजी शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रियांक खरगे और मोहम्मद हारीस नलपाड ने RSS और उसके सदस्यों के खिलाफ ऐसे बयान और पोस्ट किए, जिनसे संगठन की छवि को नुकसान पहुँचा।
प्रियांक खरगे पर सोशल मीडिया पोस्ट का आरोप
शिकायत के अनुसार, प्रियांक खरगे ने 14 अगस्त 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर RSS और उसके सदस्यों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक पोस्ट साझा की थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस पोस्ट से संगठन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची और समाज में RSS की छवि खराब करने की कोशिश की गई।
अदालत ने शिकायत, सोशल मीडिया लिंक और उपलब्ध सामग्री की प्रारंभिक जाँच के बाद प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ पाया। इसके बाद अदालत ने प्रियांक खरगे के खिलाफ आपराधिक मानहानि से जुड़ी कार्यवाही आगे बढ़ाने का आदेश दिया।
नलपाड के यूट्यूब इंटरव्यू पर भी सवाल
मोहम्मद हारीस नलपाड पर आरोप है कि उन्होंने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में RSS के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक बयान दिए। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि नलपाड के बयान संगठन की छवि को नुकसान पहुँचाने वाले थे।
अदालत ने नलपाड के खिलाफ भी संज्ञान लेते हुए उन्हें 21 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब इसी तारीख को होगी।
दिनेश गुंडू राव के खिलाफ फिलहाल कार्यवाही नहीं
इसी शिकायत में कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव का नाम भी शामिल था। हालांकि, अदालत ने उनके खिलाफ फिलहाल कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है। अदालत ने उपलब्ध सामग्री और आरोपों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया।
इससे साफ है कि फिलहाल आपराधिक मानहानि की कार्यवाही प्रियांक खरगे और मोहम्मद हारीस नलपाड के खिलाफ आगे बढ़ेगी।
BNS की धारा 356 के तहत मामला
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। यदि अदालत में आरोप साबित होते हैं, तो इस धारा के तहत अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान हो सकता है।
हालांकि, अभी यह मामला प्रारंभिक स्तर पर है और अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। अंतिम निर्णय अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर होगा।
RSS कार्यकर्ता की निजी शिकायत पर कार्रवाई
यह मामला किसी सरकारी एजेंसी की FIR से नहीं, बल्कि RSS कार्यकर्ता ए. तेजस की निजी शिकायत से शुरू हुआ है। शिकायतकर्ता ने अदालत में सोशल मीडिया पोस्ट, इंटरव्यू लिंक और अन्य सामग्री पेश करते हुए आरोप लगाया था कि इन बयानों का उद्देश्य RSS की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना था।
अदालत ने प्रारंभिक सामग्री को देखते हुए संज्ञान लिया और दोनों नेताओं को समन जारी किया। इस आदेश के बाद कर्नाटक की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
कर्नाटक की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल
प्रियांक खरगे कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और नलपाड भी यूथ कांग्रेस से जुड़े चर्चित चेहरे हैं। ऐसे में अदालत के इस आदेश के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।
RSS से जुड़े मामलों पर कर्नाटक में पहले भी राजनीतिक बहस होती रही है। अब अदालत द्वारा समन जारी किए जाने के बाद यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
21 जुलाई की सुनवाई पर नजर
अब सबकी नजर 21 जुलाई 2026 को होने वाली सुनवाई पर रहेगी। इस दिन प्रियांक खरगे और मोहम्मद हारीस नलपाड को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। सुनवाई के दौरान अदालत आगे की कार्यवाही तय करेगी।
यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक आलोचना और मानहानि की कानूनी सीमा जैसे मुद्दों को भी फिर से चर्चा में ला सकता है। अदालत की आगे की कार्यवाही तय करेगी कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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