अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “भारत महान देश है, जिसका नेतृत्व मेरे बहुत अच्छे मित्र कर रहे हैं।” ट्रंप मिस्र के शर्म अल शेख शहर में आयोजित विश्व नेताओं के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन इजराइल-हमास युद्ध को समाप्त करने के लिए हुए युद्धविराम समझौते के बाद बुलाया गया था। अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि “भारत और पाकिस्तान एक साथ बहुत अच्छी तरह रहेंगे।”
ट्रंप ने यह बयान अपने पीछे खड़े पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर देखते हुए दिया। उन्होंने कहा, “भारत महान देश है और मेरे बहुत अच्छे मित्र उसका नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने शानदार काम किया है। मुझे लगता है कि पाकिस्तान और भारत साथ मिलकर बहुत अच्छे से रहेंगे।” इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की भी तारीफ की और कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि दोनों देश सहयोग और शांति के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।
📍प्रेसिडेंट #Trump ने पाक प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की ओर देखते हुए कहा —
🗣️ 🇮🇳 “भारत एक महान देश है, वहाँ मेरा एक अच्छा दोस्त सत्ता में है। उसने बेहतरीन काम किया है। मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान अब बहुत अच्छे से साथ रहेंगे।” pic.twitter.com/UMl6b0pE4U
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) October 13, 2025
शरीफ के भाषण के बाद ट्रंप ने मंच पर वापस आकर मजाकिया लहजे में कहा, “अब कहने को कुछ बचा नहीं है, चलो घर चलते हैं।” इससे पहले उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की प्रशंसा की और शरीफ को सभा को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया था।
ट्रंप ने अपने भाषण में यह भी दावा किया कि उन्होंने अब तक आठ युद्ध रुकवाए हैं। उन्होंने कहा, “ऐसा करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मैंने लाखों लोगों की जान बचाई है।” ट्रंप के अनुसार, इजराइल-गाजा युद्ध के संघर्ष विराम के बाद यह संख्या सात से बढ़कर आठ हो गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने का कोई अफसोस नहीं है, क्योंकि उन्होंने यह सब किसी पुरस्कार के लिए नहीं बल्कि “जीवन बचाने के लिए” किया।
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई बार भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम का श्रेय लेने का दावा कर चुके हैं। उन्होंने 10 मई को सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि अमेरिका की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान “पूर्ण और तत्काल” संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, भारत ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि संघर्षविराम पर सहमति दोनों देशों की सेनाओं के डीजीएमओ (DGMO) के बीच हुई सीधी बातचीत का परिणाम थी, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का।