जालोर में पंचायत का फरमान बना विवाद की वजह, बहू-बेटियों पर कैमरे वाले मोबाइल पर प्रतिबंध
राजस्थान के जालोर जिले में पंचायत के एक फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। चौधरी समाज की सुंधामाता पट्टी की पंचायत ने 15 गांवों की बहू-बेटियों के लिए कैमरे वाले स्मार्टफोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। पंचायत के अनुसार यह नियम 26 जनवरी से लागू किया जाएगा।
स्मार्टफोन की जगह केवल की-पैड फोन की अनुमति
पंचायत के फैसले के तहत महिलाएं अब स्मार्टफोन की जगह केवल की-पैड मोबाइल फोन का ही इस्तेमाल कर सकेंगी। इसके अलावा शादी-समारोह, सामाजिक कार्यक्रमों और यहां तक कि पड़ोसी के घर जाते समय भी मोबाइल फोन साथ ले जाने पर रोक लगाई गई है।
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— One India News (@oneindianewscom) December 23, 2025
गाजीपुर गांव में हुई बैठक में लिया गया फैसला
यह निर्णय रविवार को जालोर जिले के गाजीपुर गांव में आयोजित पंचायत बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता 14 पट्टी के अध्यक्ष सुजनाराम चौधरी ने की। समाज अध्यक्ष के मुताबिक, पंच हिम्मताराम ने प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसे देवाराम कारनोल पक्ष की ओर से रखा गया था। चर्चा के बाद सभी पंचों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इन 15 गांवों में लागू होगा आदेश
पंचायत का यह फैसला गाजीपुरा, पावली, कालड़ा, मनोजियावास, राजीकावास, दातलावास, राजपुरा, कोड़ी, सिदरोड़ी, आलड़ी, रोपसी, खानादेवल, साविधर, भीनमाल के हाथमी की ढाणी और खानपुर गांवों में लागू होगा।
पढ़ाई के लिए घर के भीतर सीमित उपयोग की छूट
सुजनाराम चौधरी ने बताया कि पढ़ाई करने वाली बच्चियों को जरूरत पड़ने पर घर के भीतर मोबाइल उपयोग की अनुमति दी जाएगी, लेकिन वे किसी भी सार्वजनिक या सामाजिक कार्यक्रम में मोबाइल फोन साथ नहीं ले जा सकेंगी।
पंचायत ने बताई फैसले की वजह
पंचायत का कहना है कि महिलाओं के पास मोबाइल होने से बच्चे उसका अधिक उपयोग करने लगते हैं, जिससे उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी कारण मोबाइल फोन के इस्तेमाल को नियंत्रित करना जरूरी समझा गया और यह फैसला लिया गया।
विरोध तेज, महिला संगठनों ने बताया तुगलकी फरमान
पंचायत के इस फैसले के खिलाफ विरोध भी शुरू हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला अधिकार संगठनों ने इसे महिला-विरोधी और तुगलकी फरमान करार दिया है। कई लोगों ने ऐसे फैसलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है, जिससे यह मुद्दा अब सामाजिक बहस का रूप लेता नजर आ रहा है।
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