भावनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीएसटी दरों में कमी की वजह से इस बार त्योहारों की रौनक और बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि उत्सव के इसी माहौल में देश समुद्र से समृद्धि का महाउत्सव मना रहा है। प्रधानमंत्री ने भाषण की शुरुआत में भावनगरवासियों से क्षमा मांगते हुए कहा कि वे हिंदी में संबोधित कर रहे हैं ताकि देश के सभी लोग जुड़ सकें।

पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत समुद्र को बहुत बड़े अवसर के रूप में देख रहा है। उन्होंने बताया कि थोड़ी देर पहले ही पोर्ट-लेड डेवलपमेंट को गति देने के लिए हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया है। इसके साथ ही, मुंबई में क्रूज़ टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल का लोकार्पण भी किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का कोई दुश्मन नहीं है, बल्कि भारत विश्व बंधुत्व की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। लेकिन सच्चे अर्थों में अगर भारत का कोई दुश्मन है, तो वह है दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता। यही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है और हमें मिलकर इस निर्भरता को हराना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि “जितनी ज्यादा विदेशी निर्भरता, उतनी ज्यादा देश की विफलता।”

मोदी ने कहा कि भारत के बंदरगाह वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में देश के उदय की रीढ़ हैं। चाहे चिप (सेमीकंडक्टर) हों या शिप, इन्हें भारत में ही बनाना होगा। उन्होंने बताया कि भारत हर साल विदेशी कंपनियों को सामान भेजने के लिए लगभग छह लाख करोड़ रुपये चुकाता है, जो हमारे रक्षा बजट के बराबर है।

पीएम ने याद दिलाया कि 50 साल पहले देश का 40 प्रतिशत व्यापार भारत निर्मित जहाजों से होता था, लेकिन अब यह घटकर केवल पांच प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि लाइसेंस राज जैसी पाबंदियों ने भारत के प्रतिभाशाली लोगों के हौसलों को कमजोर कर दिया। अंत में उन्होंने दोहराया कि भारत की सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान आत्मनिर्भरता है।