प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (8 दिसंबर) को लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह गीत आजादी की प्रेरणा और ऊर्जा का स्रोत रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि इस महान जयघोष का स्मरण करना देश के लिए सौभाग्य की बात है।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की 150 वर्षों की यात्रा कई उतार-चढ़ावों से भरी रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि जब वंदे मातरम के 50 वर्ष हुए थे, तब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था और जब इसके 100 वर्ष पूरे हुए, तब देश आपातकाल के अंधकारमय दौर से गुजर रहा था। मोदी ने कहा कि जिस गीत ने देश को आजादी का उत्साह दिया, उसके 100 वर्ष पूरे होने पर ही लोकतंत्र का गला घोंटने जैसे कृत्य सामने आए थे।
Speaking in the Lok Sabha. https://t.co/qYnac5iCTB
— Narendra Modi (@narendramodi) December 8, 2025
पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगाँठ देश के गौरव को पुनर्स्थापित करने का अवसर है। उनके अनुसार, वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता संग्राम में भावात्मक नेतृत्व प्रदान किया था। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि आज़ादी के नायकों के सपनों को पूरा करने के संकल्प के साथ 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी, जब 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेज साम्राज्य भारत पर अत्याचार बढ़ा रहा था। ब्रिटिश शासन ‘God Save The Queen’ को भारत में फैलाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बंकिमचंद्र ने चुनौती देते हुए वंदे मातरम् की रचना की, जिसे बाद में उन्होंने 1882 में अपने उपन्यास ‘आनंद मठ’ में सम्मिलित किया।
मोदी ने कहा कि यह गीत केवल राजनीतिक आजादी का मंत्र नहीं था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक चेतना को पुनर्जीवित करने का भावगीत भी था। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने लाखों भारतीयों को यह एहसास कराया कि लड़ाई किसी सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि माँ भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए थी।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि अंग्रेज भारत में अपना शासन बनाए रखने के लिए ‘बाँटो और राज करो’ की नीति पर चलते थे और बंगाल को इसका प्रयोगशाला बनाया गया था। 1905 में जब बंगाल विभाजन किया गया, तो वंदे मातरम् बंगाल की एकता का प्रतिरोधी स्वर बनकर उभरा। अंग्रेजों ने इसकी शक्ति को समझते हुए इस गीत को गाने, छापने और उच्चारित करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
मोदी ने कहा कि इतिहास में ऐसे बहुत कम उदाहरण मिलते हैं जहाँ कोई गीत कोटि-कोटि जनों को स्वतंत्रता की लड़ाई में बलिदान के लिए प्रेरित करे। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि वंदे मातरम् जैसे भावगीत की रचना भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है।
कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक कर वन्दे मातरम् के टुकड़े कर दिए… pic.twitter.com/mwFMDF67wR
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) December 8, 2025
अपने भाषण में पीएम मोदी ने जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग के विरोध के दबाव में कांग्रेस ने वंदे मातरम् से समझौता कर लिया। मोदी ने आरोप लगाया कि मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा 1937 में वंदे मातरम् के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों के बाद नेहरू ने इसके उपयोग की पड़ताल शुरू कर दी और कांग्रेस ने इसके अंशों को अलग कर दिया। उन्होंने कहा कि यही तुष्टीकरण की राजनीति आगे चलकर भारत विभाजन का कारण बनी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् भारत की एकता, प्रेरणा और देशभक्ति का प्रतीक है, और आज इसके 150 वर्ष पूरे होने पर देश को इसे प्रेरणा स्रोत बनाकर आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।
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