प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपने मंत्रालय से इतर किसी अन्य विषय पर बेवजह बयानबाजी से बचें। पीएम मोदी ने कहा कि सभी मंत्री सरकार के 11 वर्षों की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएं और अपने मंत्रालय के कार्यों और योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक करें। इसके लिए उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे माध्यमों का भी सुझाव दिया ताकि मंत्रालयों की कार्यक्षमता और उपलब्धियों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
बैठक में प्रधानमंत्री की यह नसीहत ऐसे समय आई है जब कुछ मंत्रियों के बयानों को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक बहसें तेज हुई हैं। पीएम मोदी चाहते हैं कि मंत्रिपरिषद का हर सदस्य जिम्मेदारी से पेश आए और केंद्र सरकार के विकास एजेंडे पर केंद्रित रहे।
कैबिनेट बैठक में जहां नीति निर्देश दिए गए, वहीं व्यावहारिक फैसले भी लिए गए। बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने झारखंड, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के सात जिलों से होकर गुजरने वाली दो महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं की कुल लागत 6,405 करोड़ रुपये है।
पहली परियोजना झारखंड के कोडरमा-बरकाकाना रेल खंड के 133 किलोमीटर लंबे ट्रैक के दोहरीकरण से संबंधित है। यह क्षेत्र राज्य के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और यह ट्रैक पटना एवं रांची के बीच एक कुशल और कम दूरी वाला रेल संपर्क प्रदान करता है।
दूसरी परियोजना कर्नाटक के बेल्लारी और चिकजाजुर के बीच 185 किलोमीटर लंबे ट्रैक के दोहरीकरण की है, जो आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से भी होकर गुजरता है। इन दोनों मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से कुल 1,408 गांवों तक बेहतर रेल संपर्क पहुंचेगा, जिनकी कुल आबादी 28.19 लाख है।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से कोयला, इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और कृषि उत्पादों जैसे महत्वपूर्ण माल के परिवहन में 4.9 करोड़ टन सालाना की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी। इससे भारतीय रेलवे की संचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
इन पहलों को प्रधानमंत्री मोदी के ‘नए भारत’ के विजन से जोड़ते हुए सरकार ने कहा कि इससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और देश की लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। रेल मंत्रालय ने यह भी बताया कि इन परियोजनाओं से देश का मौजूदा रेल नेटवर्क करीब 318 किलोमीटर तक विस्तार पाएगा।
इसके साथ ही, यह अनुमान लगाया गया है कि इन परियोजनाओं के कारण 52 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 264 करोड़ किलोग्राम की कटौती होगी — जो पर्यावरण की दृष्टि से 11 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर प्रभाव डालेगा। यह सब पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एकीकृत योजना का परिणाम है, जिसका उद्देश्य वस्तुओं, सेवाओं और लोगों की आवाजाही को सुगम बनाना है।