नई दिल्ली में आयोजित ‘रचनात्मक कॉन्ग्रेस राष्ट्रीय अधिवेशन’ के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं का एक ऐसा रूप सामने आया, जिसने भारतीय राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की विदेश नीति का मजाक उड़ाने के चक्कर में कॉन्ग्रेस नेता मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ गए। इस कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित द्वारा दिए गए बयानों ने पार्टी के भीतर महिलाओं के प्रति सोच और कार्य संस्कृति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विदेश नीति के मजाक में उड़े शालीनता के धज्जियां
अधिवेशन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी अचानक नाटकीय अंदाज में आ गए और उन्होंने मंच पर मौजूद संदीप दीक्षित को अपनी ओर बुलाया। प्रधानमंत्री मोदी की ‘हग डिप्लोमेसी’ (Hug Diplomacy) का मजाक उड़ाते हुए राहुल गांधी ने दीक्षित को अजीब तरीके से गले लगाया। दर्शक इस नाटक पर हंस ही रहे थे कि इसी दौरान बीच में बोलते हुए संदीप दीक्षित ने एक बेहद आपत्तिजनक, भद्दी और सेक्सिस्ट टिप्पणी कर डाली।
दीक्षित ने तंज कसते हुए कहा— “कहीं मेलोनी समझकर तो नहीं पकड़ा था?”
What a clown… Does he fit for the LOP post?
Someone tell him that Hugging foreigners is any day better than secretly bedding with them. pic.twitter.com/bLgIjnrZp5
— Mr Sinha (@Mrsinha) August 13, 2026
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को बीच में लाकर किया गया यह भद्दा मजाक तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद राहुल गांधी सहित मंच पर बैठे अन्य नेता और कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत जोर-जोर से हंसने लगे। भारत और इटली के बीच के कूटनीतिक और मैत्रीपूर्ण रिश्तों को इस तरह के घटिया चुटकुलों तक सीमित कर देना कॉन्ग्रेस की राजनीतिक संस्कृति पर बड़ा आघात है।
कॉन्ग्रेस में सेक्सिज्म का पुराना और गहरा इतिहास
यह कोई पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस नेताओं या प्रवक्ताओं की तरफ से महिलाओं के प्रति इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया हो। पार्टी के भीतर महिला विरोधियों और महिला नेताओं के प्रति अपमानजनक रवैये का एक लंबा इतिहास रहा है:
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सुप्रिया श्रीनेत का विवादित बयान: कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत पहले भी बीजेपी सांसद कंगना रनौत के खिलाफ इंस्टाग्राम पर बेहद आपत्तिजनक और सेक्सिस्ट टिप्पणी (“क्या भाव चल रहा है मंडी में…”) कर चुकी हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने अकाउंट का एक्सेस किसी और के पास होने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी।
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एचएस अहीर की अभद्र टिप्पणी: कॉन्ग्रेस पदाधिकारी एचएस अहीर ने भी मंडी से कंगना रनौत की उम्मीदवारी को लेकर बेहद भद्दी और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था।
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प्रियंका चतुर्वेदी का मोहभंग: यह समस्या सिर्फ पार्टी के बाहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी की अंदरूनी महिलाएं भी इसका शिकार हुई हैं। सितंबर 2018 में मथुरा में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन पार्टी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी के साथ बदसलूकी की थी। पार्टी ने पहले आरोपियों को निकाला, लेकिन बाद में उन्हें दोबारा बहाल कर दिया। इससे आहत होकर प्रियंका चतुर्वेदी ने 2019 में अपनी गरिमा और आत्मसम्मान का हवाला देते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी हमेशा के लिए छोड़ दी।
नेतृत्व की चुप्पी और गंभीर सवाल
इन तमाम घटनाओं के बाद भी कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कभी भी ऐसे नेताओं के खिलाफ कोई सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई या निंदा देखने को नहीं मिली है। राहुल गांधी की मौजूदगी में इस तरह की सेक्सिस्ट टिप्पणियों पर ठहाके लगाना यह साबित करता है कि पार्टी के भीतर इस प्रकार की मानसिकता को किस हद तक सामान्य मान लिया गया है।
जब देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के जिम्मेदार नेता ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के राष्ट्राध्यक्षों और महिला राजनेताओं पर इस तरह की घटिया टिप्पणियां करने लगेंगे, तो आम जनता और कार्यकर्ताओं के बीच क्या संदेश जाएगा? यह घटना एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर क्यों प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करते-करते कॉन्ग्रेस नेताओं की जुबान बार-बार महिलाओं के प्रति व्यक्तिगत और अपमानजनक स्तर तक गिर जाती है।
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