वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने उत्तराखंड के कोटद्वार से एक वीडियो जारी कर ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से चर्चित दीपक कुमार के लिए दोबारा फंड जुटाने का अभियान शुरू किया है।
अंजुम ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बताया कि वह इस समय दीपक के जिम में मौजूद हैं और उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने लोगों से आर्थिक मदद करने की अपील की है।
कोटद्वार से वीडियो, जिम की हालत दिखाई
अजीत अंजुम ने अपने वीडियो में बताया कि दीपक कुमार पिछले कुछ महीनों से गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दीपक अपने जिम का किराया 4-5 महीनों से नहीं दे पाए हैं और मकान मालिक का करीब ढाई लाख रुपये बकाया है।
वीडियो में यह भी बताया गया कि विवाद के बाद जिम में आने वाले लोगों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले जहां 70-90 लोग रोजाना आते थे, अब सिर्फ 10-12 लोग ही जिम पहुंच रहे हैं, जिससे आय लगभग बंद हो गई है।
‘मोहम्मद दीपक’ विवाद से जुड़ा मामला
दीपक कुमार पहले उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने कथित तौर पर एक मुस्लिम दुकानदार को कुछ लोगों से बचाया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से पहचान मिली।
अब एक बार फिर उनके समर्थन में चंदा जुटाने की अपील की जा रही है।
दोबारा चंदा मांगने पर उठे सवाल
हालांकि, इस नए फंड अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल भी उठने लगे हैं। कई लोग पूछ रहे हैं कि पहले इकट्ठा किया गया फंड कहां गया।
दीपक कुमार पहले मीडिया में यह कह चुके हैं कि पहले मिले पैसे घरेलू खर्चों में इस्तेमाल हो गए थे। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इतने फंड के बावजूद किराया न चुका पाना कई सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक समर्थन भी सामने आया
अजीत अंजुम के इस अभियान के बाद संजय सिंह ने दीपक की मदद के लिए 50,000 रुपये देने की बात कही है। इसके अलावा कई लोग छोटे-छोटे योगदान (₹5000 से ₹10,000) के जरिए भी मदद कर रहे हैं।
अंजुम ने वीडियो में बैंक अकाउंट का QR कोड और क्राउडफंडिंग लिंक भी साझा किया है, और लोगों से 15, 50 या 100 रुपये जैसी छोटी राशि से भी सहयोग करने की अपील की है।
सालभर का खर्च जुटाने की योजना
अजीत अंजुम का कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ बकाया किराया चुकाना नहीं है, बल्कि दीपक कुमार के जिम का पूरा सालभर का खर्च जुटाना है। इसमें किराया, बिजली बिल, स्टाफ की सैलरी और मेंटेनेंस शामिल है।
उनका उद्देश्य है कि दीपक को कम से कम एक साल के लिए आर्थिक संकट से बाहर निकाला जा सके, ताकि वह अपने काम को दोबारा खड़ा कर सकें।
बढ़ती बहस और सोशल मीडिया पर चर्चा
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ कुछ लोग इसे मानवीय मदद की पहल बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पारदर्शिता और पहले के फंड के उपयोग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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