ब्रिटिश सरकार ने अमेरिका के उस अनुरोध को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है, जिसमें ईरान पर संभावित सैन्य हमले के लिए ब्रिटेन के एयरबेस के उपयोग की अनुमति मांगी गई थी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ने से तनाव चरम पर है।
प्रधानमंत्री Keir Starmer की सरकार ने स्पष्ट किया कि ईरान पर “पहले हमला” (Pre-emptive Strike) अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादित हो सकता है, इसलिए ब्रिटेन इस कार्रवाई में शामिल नहीं होगा।
RAF बेस के इस्तेमाल पर ब्रिटेन की आपत्ति
अमेरिका ने कथित तौर पर ब्रिटिश वायुसेना (RAF) के ठिकानों के उपयोग की मांग की थी। लेकिन लंदन ने कहा कि यदि कोई सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं होती, तो उसमें सहयोग करने वाला देश भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
ब्रिटेन का यह रुख अमेरिका के साथ उसके पारंपरिक रक्षा सहयोग के बीच एक अहम कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
Chagos Islands और Diego Garcia पर भी तनाव
दोनों देशों के बीच पहले से ही Chagos Islands को लेकर मतभेद चल रहे हैं। ब्रिटेन इन द्वीपों को मॉरीशस को सौंपने की योजना बना रहा है और वहां स्थित रणनीतिक सैन्य अड्डे Diego Garcia को 99 वर्षों के लिए लीज पर वापस लेने का प्रस्ताव है।
Diego Garcia बेस को अमेरिका के लिए मध्य पूर्व और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य अभियानों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में इस मुद्दे पर वाशिंगटन और लंदन के बीच रणनीतिक असहमति सामने आई है।
क्या बढ़ेगा मध्य पूर्व में तनाव?
अमेरिका द्वारा ईरान के आसपास सैन्य तैनाती बढ़ाए जाने से क्षेत्र में युद्ध की आशंका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ब्रिटेन का यह फैसला दर्शाता है कि वह संभावित सैन्य टकराव में सीधे शामिल होने से बचना चाहता है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों, अंतरराष्ट्रीय कानून और मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
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