गुजरात विधानसभा में मंगलवार को Bhupendra Patel ने ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (UCC) बिल पेश करते हुए इसे भारत की सभ्यतागत एकता और समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने Rigveda के संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं “साथ चलने, साथ बोलने और विचारों में एकता” की भावना पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा कि यह बिल Article 44 और Narendra Modi के “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” विजन के अनुरूप है और राज्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।
UCC बिल के प्रमुख प्रावधान
- सभी धर्मों में विवाह का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य
- रजिस्ट्रेशन न कराने पर ₹10,000 तक जुर्माना
- जबरन या धोखाधड़ी से विवाह पर 7 साल तक की सज़ा
- तलाक के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य, बाहर किए गए तलाक अमान्य
- बिना शर्त महिलाओं को पुनर्विवाह का अधिकार
ऐतिहासिक!
माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने विधानसभा में UCC पारित किया।
न कोई कानून से ऊपर। न कोई नागरिक नीचे।
समान गुजरात। सशक्त गुजरात। #UCC #Gujarat #BJPDelivers
— Harsh Sanghavi (@sanghaviharsh) March 24, 2026
महिलाओं को समान अधिकार
इस बिल का सबसे अहम प्रावधान विरासत में बेटों और बेटियों को समान अधिकार देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा और महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पर्सनल लॉ में मौजूद भेदभावपूर्ण प्रथाओं को समाप्त करना जरूरी है, ताकि हर महिला को न्याय मिल सके।
लिव-इन रिलेशनशिप पर भी नियम
UCC बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को भी रेगुलेट किया गया है:
- रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
- रजिस्ट्रेशन न कराने पर 3 महीने तक की जेल या ₹10,000 जुर्माना
- 18–21 वर्ष के बीच के लोगों के मामलों में माता-पिता को सूचना
धार्मिक परंपराओं में दखल नहीं
चिंताओं को दूर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि UCC धार्मिक रीति-रिवाजों या परंपराओं में कोई दखल नहीं देगा, बल्कि यह सिर्फ़ नागरिक मामलों के कानूनी पहलुओं को ही नियंत्रित करेगा। उन्होंने बताया कि कुछ समुदायों में चचेरे भाई-बहनों के बीच शादी जैसी प्रथाएँ, जहाँ रीति-रिवाजों के अनुसार इनकी अनुमति है, आगे भी मान्य रहेंगी।
भूपेंद्र पटेल ने कहा, “अल्पसंख्यक समुदायों में चचेरे भाई-बहनों के बीच शादी एक मान्य परंपरा है, और इस बिल में साफ़ तौर पर कहा गया है कि जहाँ रीति-रिवाजों के अनुसार ऐसी शादियों की अनुमति है, वहाँ ये कानूनी रूप से मान्य रहेंगी। इसलिए, UCC के तहत ऐसी परंपराएँ जहाँ स्वीकार्य हैं, वहाँ जारी रहेंगी; कानून इन पर रोक नहीं लगाता।”
समिति की सिफारिशों पर आधारित
यह विधेयक Justice Ranjana Desai की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, मौजूदा कानूनों और अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन किया गया।
अनुसूचित जनजातियों को छूट
Article 366(25) के तहत परिभाषित अनुसूचित जनजातियों को इस कानून से बाहर रखा गया है, ताकि उनकी परंपराएं सुरक्षित रहें।
‘विकसित भारत’ की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामाजिक समानता जरूरी है और UCC इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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