सबरीमाला मंदिर में करोड़ों रुपये के सोने की हेराफेरी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कड़ा एक्शन लिया है। मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को ED की टीमों ने केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में एक साथ 21 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मंदिर की संपत्तियों और सोने के गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई है। कोच्चि जोनल ऑफिस द्वारा की गई यह छापेमारी पहले से गिरफ्तार 11 आरोपितों के बाद की गई कार्रवाई मानी जा रही है, जो फिलहाल जेल में बंद हैं।
इस मामले में अब तक कई रसूखदार चेहरों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार लोगों में सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदरारू राजीवरु, CPI(M) के तीन नेता, पूर्व विधायक ए. पद्मकुमार, मरम्मत कार्य से जुड़े उन्नीकृष्णन पोट्टी और चेन्नई की एक निजी फर्म का मालिक व ज्वेलर गोवर्धन रोड्डम शामिल हैं। इन सभी पर सोने की हेराफेरी और आपराधिक साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं।
तिरुवल्लुर, तमिलनाडु: प्रवर्तन विभाग (Enforcement Directorate) सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में 21 स्थानों पर छापेमारी कर रहा है, जिसमें चेन्नई में 6 स्थान शामिल हैं।
जांच का लक्ष्य द्वार पालक मूर्तियों की स्वर्ण चढ़ाई में अनियमितताओं पर है, और… pic.twitter.com/ToIC6vrItQ
— One India News (@oneindianewscom) January 20, 2026
ED की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वर्ष 2019 से 2025 के बीच मंदिर की बेशकीमती सोने की कलाकृतियों को सरकारी रिकॉर्ड में जानबूझकर ‘तांबे की प्लेट’ के रूप में दर्ज किया गया। इसी धोखाधड़ी की आड़ में असली सोना मंदिर परिसर से बाहर भेजा गया। जांच में सामने आया है कि चेन्नई और कर्नाटक में केमिकल प्रोसेस के जरिए इन मूर्तियों से सोना निकाला गया और फिर इस अवैध कमाई को अलग-अलग बैंक खातों में छिपाया गया।
मामला तब और गंभीर हो गया जब यह सामने आया कि मरम्मत के लिए चेन्नई भेजी गई 42.8 किलो सोने की मूर्तियों में से वापसी के समय 4.5 किलो सोना गायब था। हैरानी की बात यह रही कि मरम्मत करने वाले व्यक्ति ने ईमेल के जरिए मंदिर का सोना अपने रिश्तेदार की शादी में इस्तेमाल करने की बात भी स्वीकार की।
कोर्ट के आदेश पर गठित SIT ने जांच में पाया कि यह कोई लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अधिकारी, नेता और बड़े ज्वैलर्स शामिल थे। इस घोटाले के केंद्र में वह 30 किलो सोना भी बताया जा रहा है, जिसे सालों पहले विजय माल्या ने दान किया था।
फिलहाल ED इस बात की गहन जांच कर रही है कि चोरी किए गए सोने और उससे मिली रकम कहां-कहां लगाई गई। CPI(M) के पूर्व विधायक ए. पद्मकुमार और मुख्य पुजारी कंदरारू राजीवरु समेत कई प्रभावशाली लोग जांच के घेरे में हैं। एजेंसी को आशंका है कि मंदिर के चढ़ावे और अन्य अनुष्ठानों से जुड़े वित्तीय लेन-देन में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है।
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