महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रोहित तिलक ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। पुणे में पिछले कुछ समय से बढ़ती अंदरूनी नाराजगी के बीच उनके इस फैसले को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। रोहित तिलक महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के परपोते हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए थे। उनके इस्तीफे से पुणे में कांग्रेस संगठन के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है।
महाराष्ट्र कांग्रेस में लगातार बढ़ रही नाराजगी
पिछले कुछ महीनों में कई प्रमुख नेताओं के पार्टी छोड़ने से महाराष्ट्र में कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है। इससे पहले Ravindra Dhangekar, Sangram Thopte और Sanjay Jagtap भी कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों के कारण राज्य में पार्टी संगठन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
स्वतंत्रता आंदोलन से रहा तिलक परिवार और कांग्रेस का संबंध
इस्तीफे के बाद रोहित तिलक ने कहा कि उनके परिवार और कांग्रेस का रिश्ता स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से रहा है। उस समय कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं थी, बल्कि देश की आजादी की लड़ाई की प्रमुख ताकत थी। उन्होंने बताया कि उनके दादा से लेकर परिवार के कई सदस्यों ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा है। हालांकि पिछले दो से तीन वर्षों से पार्टी के भीतर उनके खिलाफ लगातार शिकायतें की जा रही थीं, जिससे पार्टी के साथ उनकी दूरी बढ़ती चली गई।
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार को लेकर विवाद
रोहित तिलक के ट्रस्ट की ओर से वर्ष 1983 से Lokmanya Tilak National Award दिया जाता है। यह सम्मान राजनीति, विज्ञान, अर्थशास्त्र और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार से पहले Indira Gandhi, Sharad Pawar और Pranab Mukherjee जैसी हस्तियों को सम्मानित किया जा चुका है।
हालांकि लगभग तीन वर्ष पहले जब यह पुरस्कार Narendra Modi को दिया गया था, तब कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई थी। रोहित तिलक के मुताबिक इसी मुद्दे को लेकर पार्टी के भीतर लगातार शिकायतें की जाती रहीं।
सामाजिक पुरस्कार पर राजनीति गलत: तिलक
रोहित तिलक ने कहा कि लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार पूरी तरह सामाजिक सम्मान है और इसे किसी भी राजनीतिक दल के नाम पर नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार पार्टी को इस विषय पर स्पष्ट किया, लेकिन बार-बार वही शिकायतें सामने आती रहीं। उनके अनुसार यदि एक सामाजिक पुरस्कार को लेकर भी संकीर्ण राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाया जाए तो पार्टी में काम करना मुश्किल हो जाता है।
दो साल से सक्रिय राजनीति से दूरी
लगातार विवाद और नाराजगी के कारण रोहित तिलक पिछले दो वर्षों से कांग्रेस की सक्रिय राजनीति से दूर थे। हालांकि स्थिति में सुधार न होने के कारण उन्होंने अंततः पार्टी से इस्तीफा देने का फैसला लिया।
क्या शिंदे की शिवसेना में शामिल होंगे?
अपने भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर रोहित तिलक ने संकेत दिया कि वे Eknath Shinde के नेतृत्व से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि उनके सामाजिक कार्यों को देखते हुए एकनाथ शिंदे ने उन्हें राज्यसभा की उम्मीदवारी देने पर भी विचार किया था। हालांकि उस समय Sharad Pawar का नाम आगे आने के कारण उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं किया।
रोहित तिलक ने कहा कि एकनाथ शिंदे ऐसे नेता हैं जो कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाते हैं और उनके साथ काम करने की इच्छा है। हालांकि उन्होंने Shiv Sena (शिंदे गुट) में शामिल होने को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है।
कांग्रेस के सामने बढ़ी राजनीतिक चुनौती
लगातार इस्तीफों के बाद पुणे में कांग्रेस संगठन कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। स्थानीय स्तर पर कई नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी जल्द ही संगठनात्मक मतभेदों को दूर नहीं कर पाती है, तो आने वाले चुनावों में उसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel