पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में जनआक्रोश तेज होता जा रहा है। रावलकोट समेत पूरे पुंछ डिवीजन में पिछले एक सप्ताह से लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रही जनता के गुस्से का नतीजा बताया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के आह्वान पर ‘शटर डाउन हड़ताल’ की गई, जिसके तहत दुकानों को बंद रखा गया, सड़कों को जाम किया गया और बड़े पैमाने पर रैलियां निकाली गईं। प्रदर्शनकारियों ने शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बिजली, पानी व इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर आक्रोश जताया। रैलियों में ‘जब तक जनता तंग रहेगी, जंग रहेगी’, ‘पानी चोर’ और ‘बिजली चोर’ जैसे नारे गूंजे।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य शिकायत यह है कि उन्हें कई-कई दिनों तक बिजली नहीं मिलती, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बार-बार बंद कर दी जाती हैं और साफ पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि उनके क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल तो किया जाता है, लेकिन बदले में स्थानीय आबादी को कोई लाभ नहीं मिलता। बेरोजगारी और महंगाई भी लंबे समय से क्षेत्र की बड़ी समस्याएं बनी हुई हैं।
बिजली संकट को लेकर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हालिया बाढ़ के चलते कई इलाकों में बिजली के खंभे गिर गए थे, जिन्हें अब तक ठीक नहीं किया गया है। वहीं पानी की किल्लत भी गंभीर मुद्दा बन गई है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि भारत के साथ सिंधु जल समझौते के समाप्त होने के बाद पाकिस्तान में पानी की स्थिति और खराब हो गई है, जिसका असर POK पर भी पड़ा है।
Pakistan Occupied Kashmir (PoK)
Major protest was held in Rawalakot, PoK and Kashmir against unjust electricity load shedding, poor mobile and internet services, and for the release of journalist Sohrab Barkat.
In this video, Umar Nazir Kashmiri, Core Member of the Jammu… pic.twitter.com/piCHw1Pp4y
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) December 16, 2025
प्रदर्शन के दौरान एक स्थानीय पत्रकार सोहराब बरकत की रिहाई की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। JKJAAC के नेतृत्व में व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, वकीलों और नागरिक समाज संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। रैलियों में यह भी ऐलान किया गया कि विरोध के तहत दो प्रमुख मार्ग—ब्रीड स्टेशन और शाहराह-ए-गाजी मिल्लत की ओर जाने वाले रास्ते—बंद किए जाएंगे।
बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए पाकिस्तानी प्रशासन ने क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपनी मांगों के पूरा होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
पत्रकार सोहराब बरकत को लेकर बताया गया है कि वह पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट ‘सियासत’ में कार्यरत हैं और एक यूट्यूब चैनल भी संचालित करते हैं। उन्हें 26 नवंबर 2026 को इस्लामाबाद एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था, जब वह संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में जा रहे थे। पाकिस्तानी राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (NCCIA) ने उन पर सरकारी संस्थानों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी और गलत सूचना फैलाने के आरोप लगाए हैं।
बरकत के वकील साद रसूल के अनुसार, जिस टिप्पणी को लेकर मामला दर्ज किया गया, वह पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की नेता सनम जावेद द्वारा एक इंटरव्यू में कही गई थी, जिसे सियासत के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किया गया था। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले अमेरिकी संगठन CPJ ने बरकत की हिरासत को पाकिस्तान में मीडिया पर बढ़ते दबाव का उदाहरण बताया है।
गौरतलब है कि POK में यह पहला ऐसा विरोध नहीं है। बीते तीन महीनों में दूसरी बार सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन देखने को मिले हैं। अक्टूबर 2025 में भी 38 मांगों को लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतरे थे, लेकिन उस समय पाकिस्तानी प्रशासन ने मांगें मानने के बजाय बल प्रयोग किया था। उस दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में 12 लोगों की मौत हो गई थी।
विश्लेषकों का मानना है कि POK में फैली यह अशांति शहबाज शरीफ सरकार की प्रशासनिक विफलता और कमजोर शासन व्यवस्था को उजागर करती है। जिस पाकिस्तान की सरकार भारत के खिलाफ कश्मीरियों के अधिकारों की रक्षा का दावा करती है, वही अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में लोगों की बुनियादी जरूरतें तक पूरी नहीं कर पा रही है। दशकों से चले आ रहे शोषण, भ्रष्टाचार और दमन से त्रस्त लोग अब खुलकर आवाज उठा रहे हैं। यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में POK में तनाव और अधिक बढ़ सकता है।
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