कर्नाटक के धर्मस्थल कथित सामूहिक दफन मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट बेलतंगडी कोर्ट में जमा कर दी है। लगभग 3,900 पन्नों की इस रिपोर्ट में SIT ने स्पष्ट किया है कि पूरा मामला कुछ “एंटी-धर्मस्थला” एक्टिविस्टों द्वारा रची गई एक मनगढ़ंत कहानी पर आधारित था। जांच में धर्मस्थला प्रशासन को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी गई है।
SIT ने इस मामले में मुख्य आरोपित चिन्नैया सहित छह लोगों—महेश शेट्टी तिमरोडी, गिरीश मट्टन्नावर, जयंत, विट्ठल गौड़ा और सुजाता भट्ट—को आरोपी बनाया है और कोर्ट से उनकी गिरफ्तारी की अनुमति मांगी है। SIT के अनुसार, इन लोगों ने पैसे, दबाव और साजिश के जरिए झूठे बयान गढ़े और कथित गवाहों को सिखाकर मीडिया और प्रशासन को गुमराह किया। चिन्नैया, जिसे पहले व्हिसलब्लोअर बताया जा रहा था, ने भी बाद में अपना बयान बदलते हुए स्वीकार किया कि एक्टिविस्टों ने उसे झूठ बोलने के लिए मजबूर किया था। उसे SIT ने 23 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया था।
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब एक कथित गवाह ने दावा किया था कि उसने 1995 से 2014 के बीच धर्मस्थला के आसपास कई शव दफनाए थे। इसी बयान के आधार पर पुलिस ने BNS की धारा 211(a) के तहत FIR दर्ज की, जो सरकारी अधिकारी को जानकारी न देने से जुड़ी है। लेकिन SIT की जांच में ऐसे किसी भी दावे का कोई सबूत नहीं मिला।
जैसे ही जांच की दिशा एक्टिविस्टों की ओर मुड़ी, आरोपित हाई कोर्ट पहुंच गए और FIR को रद्द करने की मांग कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि FIR दर्ज करने से पहले पुलिस ने मजिस्ट्रेट से उचित अनुमति नहीं ली और SIT ने उन्हें परेशान किया। इस बीच, बीजेपी नेता बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि यह पूरा षड्यंत्र अर्बन नक्सलों और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े लोगों द्वारा रचा गया था। उन्होंने कहा कि जो बुरुड गैंग पहले धर्मस्थला प्रशासन पर आरोप लगा रही थी, अब वही SIT की चार्जशीट में अभियुक्त के तौर पर सामने आई है।
अक्टूबर में यह भी खबर आई थी कि जिन एक्टिविस्टों ने पहले FIR दर्ज करवाने की मांग की थी, वे अब उसी FIR को हाई कोर्ट में खारिज कराने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पूरे मामले की विश्वसनीयता पर और भी सवाल उठे हैं।
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