दिल्ली कार ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई की भूमिका अब सिर्फ एक संदिग्ध नहीं बल्कि एक संगठित आतंकी मॉड्यूल के संचालक के रूप में सामने आ रही है। जांच में खुलासा हुआ है कि फरीदाबाद के ढोज गाँव में उसने एक छोटा कमरा किराए पर लिया था, जहाँ वह पूरी शांति और सावधानी से एक बड़े आतंकी योजना को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। जो जगह दिखने में एक साधारण किराए का कमरा लगती थी, उसे उसने अंदर से एक मिनीयचर केमिकल फैक्ट्री में बदल दिया था।
वहीं रखी हुई एक घरेलू आटा-चक्की को उसने विस्फोटक निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स को पीसकर बारीक पाउडर में बदलने की मशीन में बदल दिया था। जांच एजेंसियों द्वारा मिली तस्वीरों और सबूतों से पुष्टि हुई है कि यह चक्की सिर्फ अनाज पीसने के लिए नहीं बल्कि ठोस रासायनिक पदार्थों को ग्राइंड करने के लिए उपयोग में लाई जा रही थी, जिससे वह हाई-इंटेंसिटी ब्लास्ट में इस्तेमाल होने वाले पाउडर तैयार कर रहा था।
इस पूरे मॉड्यूल की गंभीरता तब और बढ़ गई जब धमाके से एक दिन पहले लगभग 2,600 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट का एक वीडियो सामने आया, जिसमें यह खतरनाक रसायन एक सुनसान जगह पर एक मौलवी के घर में रखा दिखा। यह मात्रा किसी छोटे पैमाने वाले विस्फोट की नहीं बल्कि बड़े पैमाने की आतंकी तबाही की तैयारी की ओर इशारा करती है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह वही लोकेशन थी जहाँ मुजम्मिल ₹1,500 रुपये महीना किराए पर रहता था और लगातार संदिग्ध गतिविधियाँ करता था। इस पूरे मामले ने साफ कर दिया है कि दिल्ली ब्लास्ट किसी अचानक बने प्लान का हिस्सा नहीं बल्कि एक लंबी और व्यवस्थित आतंकी साजिश थी, जिसमें बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री इकट्ठा करना, उसे प्रोसेस करना और अंतिम चरण में ब्लास्ट की योजना शामिल थी।
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